Thursday, April 23, 2026

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स्कूल के पास बढ़ते प्रदूषण पर प्रशासन मौन, कंपनी की मनमानी से छात्रों का स्वास्थ्य संकट में

(प्रणयकुमार बंडी)

घुग्घुस, चंद्रपुर — घुग्घुस में 2025 के चुनावी माहौल के बीच एक गंभीर मुद्दा प्रशासन और शिक्षण विभाग की उदासीनता को उजागर कर रहा है। ACC माउंट कॉन्वेंट स्कूल के आसपास का इलाका दिन-ब-दिन धूल, धुआँ और भारी वाहतूक से प्रभावित हो रहा है, लेकिन अधिकारी मानो कुंभकर्णी नींद में सोए हों—ऐसा तीखा आरोप स्थानीय नागरिकों ने किया है।

उसगांव क्षेत्र की एक कंपनी द्वारा स्कूल से मात्र 200 मीटर की दूरी पर कोयला स्टॉक, सीमेंट, गिट्टी और अवैध परिवहन किए जाने का आरोप लगातार उठ रहा है। इससे उठने वाला धुआँ और सूक्ष्म धूलकण सीधे तौर पर स्कूली बच्चों के फेफड़ों पर असर डाल रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है, “बच्चों के फेफड़ों पर हमला हो रहा है, लेकिन प्रशासन ने आँखें बंद कर रखी हैं।”।

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स्थिति को और चिंताजनक बनाने वाली बात यह है कि कंपनी में आने-जाने वाली रेलगाड़ियाँ आवाजाही करती रहती हैं, जिससे कंपनी का गेट बार-बार बंद कर दिया जाता है। इसके कारण छात्रों, मरीजों और आम नागरिकों को लंबे समय तक गेट पर फँसना पड़ता है। नागरिकों के अनुसार, “सार्वजनिक सड़क अब कंपनी की मर्जी पर निर्भर हो गई है।”

कंपनी की कथित लापरवाही से बीते समय में उसगांव के युवा परेशान है। स्थानीय लोगों का दावा है कि कंपनी ने पुराना सुरक्षित रास्ता बंद कर दिया और नया संकरा रास्ता बनाया, जिसके कारण यह दुर्घटना की आशंका दो गुना बड़ी। इतने गंभीर हादसे के बाद भी कंपनी ने कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया—बल्कि मनमानी और बढ़ गई, ऐसा नागरिकों का आरोप है।

स्कूल के पास कोयला, सीमेंट और गिट्टी की साठवनी से सूक्ष्म धूलकणों का स्तर लगातार बढ़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि यह धूल बच्चों में दमा, एलर्जी, आँखों की जलन और श्वसन संक्रमण जैसे गंभीर रोग पैदा कर सकती है। एक चिंतित अभिभावक ने कहा,
“प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि हवा में धूल का धुआँ हर समय तैरता दिखाई देता है।”

अवैध वाहनों की लगातार आवाजाही से बच्चों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है। कई शिकायतें करने के बाद भी न तो कंपनी प्रशासन और न ही सरकारी विभागों ने कोई ठोस कार्रवाई की, जिससे नागरिकों में भारी नाराज़गी है।

घुग्घुस के नागरिकों की माँग साफ है —

“बच्चों का स्वास्थ्य खतरे में डालने वाली कंपनी पर तुरंत कार्रवाई करें, प्रदूषण रोकें, अवैध परिवहन बंद कराएं और स्कूल के पास सामग्री की साठवनी पर प्रतिबंध लगाएँ।”

लेकिन प्रशासन की चुप्पी एक बड़ा सवाल खड़ा करती है —

क्या शिक्षा विभाग और प्रदूषण नियंत्रण तंत्र वास्तव में जनहित के लिए काम कर रहे हैं, या फिर किसी दबाव में खामोश बैठे हैं?

घुग्घुस की वर्तमान स्थिति साफ दिखाती है कि बच्चों का स्वास्थ्य, नागरिकों की सुरक्षा और पर्यावरण की रक्षा—तीनों ही मुद्दे प्रशासन की प्राथमिकताओं में कहीं नहीं हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका गंभीर खामियाज़ा आने वाले वर्षों में पूरे घुग्घुस को भुगतना पड़ सकता है।

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Pranaykumar Bandi

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