(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस (जिला चंद्रपुर) — नगर परिषद चुनाव 2025 की घोषणा होते ही घुग्घुस की राजनीति में मानो भूकंप आ गया है। 2 दिसंबर को होने वाले चुनाव की तारीख सामने आते ही शहर के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज़ हो गई है। जो अब तक “समर्थन का इंतज़ार” कर रहे थे, वे अब “मैं भी उम्मीदवार” के नारे के साथ खुलकर मैदान में उतरने लगे हैं।
वर्षों से प्रभाग की सीमाओं और टिकट की प्रतीक्षा कर रहे अनेक इच्छुक उम्मीदवार अब एक-एक कर अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं। नतीजतन, शहर की स्थापित राजनीतिक शख्सियतों के समीकरण पूरी तरह उलझने लगे हैं। हर गली-मोहल्ले में “कौन किस पार्टी से लड़ेगा?” और “किसे मिलेगा टिकट?” की चर्चा जोरों पर है।
विभिन्न राजनीतिक दलों के दफ्तरों में टिकट के लिए मारा-मारी मची हुई है। कुछ लोग टिकट के भरोसे उम्मीदें पाले बैठे हैं, तो कुछ ने “टिकट न मिला तो स्वतंत्र मैदान में उतरने” की तैयारी भी शुरू कर दी है। यानी इस चुनाव में ‘भंडाकोरी’ (विद्रोह) की संभावना प्रबल नज़र आ रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि घुग्घुस का यह चुनाव इस बार सिर्फ़ विकास के मुद्दों पर नहीं, बल्कि “आंतरिक कलह और गुटबाज़ी” पर भी टिका रहेगा। पुराने नेताओं की पकड़ कमज़ोर होती दिख रही है, जबकि नए चेहरे टिकट के दम पर मैदान में अपनी जगह बनाने की कोशिश में हैं।
अब देखना यह होगा कि नामांकन प्रक्रिया के बाद कितने चेहरे टिक पाएंगे, कौन पार्टी के साथ रहेगा, और कौन खुद को ‘जनता का असली प्रतिनिधि’ बताकर अलग राह पकड़ेगा।
घुग्घुस की जनता अब बस इंतज़ार में है — कौन रहेगा वफादार, और कौन बनेगा बागी!




