मंदसौर/नीमच, मध्यप्रदेश – देश की सबसे दुर्लभ और संकटग्रस्त जंगली बिल्ली प्रजाति कैराकल (Caracal) को करीब दो दशक बाद पहली बार मध्यप्रदेश के गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में देखा गया है। यह अवलोकन चीता बाड़े में लगे ट्रैप कैमरे में दर्ज हुआ, जिससे संरक्षण के क्षेत्र में उत्साह की लहर दौड़ गई है।
इस दुर्लभ दृश्य की पुष्टि करते हुए अधिकारियों ने बताया कि यह घटना Project Cheetah के तहत किए जा रहे प्रयासों की सफलता को दर्शाती है, जिससे क्षेत्र में जैव विविधता का पुनरुत्थान हो रहा है। माना जा रहा है कि पर्यावरणीय परिस्थितियों और प्रबंधन में सुधार से कैराकल जैसे विलुप्तप्राय प्राणी भी अब लौटने लगे हैं।
कैराकल भारत में संकटग्रस्त प्रजाति मानी जाती है, जिसकी मौजूदगी अब केवल राजस्थान, गुजरात और कुछेक अन्य सीमित इलाकों तक रह गई है। वर्षों से इसकी कोई पुष्टि नहीं हो पाने के कारण विशेषज्ञ इसे लगभग स्थानीय रूप से विलुप्त मानने लगे थे।
वन विभाग और प्रोजेक्ट चीता के अंतर्गत कार्यरत विशेषज्ञ अब इस नई उपस्थिति का और अधिक विश्लेषण कर रहे हैं। यह घटना न केवल गांधी सागर के पारिस्थितिक संतुलन की पुनर्स्थापना को दर्शाती है, बल्कि यह भी इंगित करती है कि सही संरक्षण रणनीतियाँ अन्य संकटग्रस्त प्रजातियों को भी पुनः बसाने में कारगर हो सकती हैं।
यह सफलता देशभर के पर्यावरणविदों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक प्रेरणादायक संकेत है कि भारत में जैव विविधता की रक्षा और पुनरुद्धार की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।





