महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के घुग्घुस शहर समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में रहनेवाली अनेक निराधार महिलाएं बीते छह महीनों से केंद्र और राज्य सरकारी सहायता राशि से वंचित हैं। हर महीने मिलने वाले 1500 रुपये की यह आर्थिक सहायता ही उनके जीवनयापन का प्रमुख साधन है। परंतु पिछले कई महीनों से यह राशि न मिलने के कारण उनकी रोजमर्रा की जिंदगी कठिन होती जा रही है।
इन निराधार महिलाओं में ज्यादातर विधवा, बुजुर्ग, बीमार और दिव्यांगन महिलाएं शामिल हैं, जो पहले से ही जीवन की कठिन परिस्थितियों से जूझ रही हैं। कई महिलाएं बार-बार बैंक के चक्कर काट रही हैं, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। कुछ महिलाएं KYC अपडेट कराने में लगी हैं, तो कुछ बुजुर्ग महिलाएं जिन्हें चलना भी मुश्किल है, उन्हें 5 से 15 किलोमीटर दूर स्थित बैंक शाखाओं तक जाना पड़ रहा है।
शासन-प्रशासन की उदासीनता
इस गंभीर स्थिति के बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। न ही किसी राजनैतिक दल के नेता इस मुद्दे पर बोलते नजर आ रहे हैं। यह चुप्पी निराधार वर्ग के प्रति संवेदनहीनता को दर्शाती है।
लाडली बहन योजना बनी वजह?
सूत्रों के अनुसार, जब से महाराष्ट्र सरकार ने ‘लाडली बहन योजना’ शुरू की है, तब से निराधार व्यक्तियों को मिलने वाली सहायता राशि में अनियमितता और देरी देखी जा रही है। इस योजना के तहत सरकार ने महिलाओं को आर्थिक सहायता देने की पहल की है, जो कि एक सराहनीय कदम है। परंतु इसका अप्रत्यक्ष असर उन निराधार महिलाओं पर पड़ा है जो पहले से ही अलग योजना के तहत सहायता पा रही थीं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं की चिंता
चंद्रपुर जिले के घुग्घुस शहर के सामाजिक कार्यकर्ता अमित बोरकर के अनुसार, “लाडली बहन योजना के बाद से निराधार लोगों को मिलने वाली राशि में बाधा आई है। सरकार को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और जल्द से जल्द निराधार लोगों की समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए।”
वहीं चंद्रपुर ग्रामीण कांग्रेस कमिटी एस.सी. सेल के तालुका अध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार वर्मा का कहना है, “लाडली बहन योजना निश्चित रूप से महिलाओं के लिए एक मददगार योजना है, लेकिन इसके बाद निराधार लोगों को मिलने वाला अनुदान रुक गया है। जिससे उन्हें जीवन की बुनियादी जरूरतें पूरी करने में भी कठिनाई हो रही है। सरकार को चाहिए कि वह दोनों योजनाओं को समान रूप से लागू करे, ताकि किसी भी वर्ग के साथ अन्याय न हो।”
जरूरत है संवेदनशीलता और समाधान की
सरकार की योजनाएं अगर किसी वर्ग को लाभ पहुंचाती हैं, तो यह एक सकारात्मक पहल है, लेकिन इसके चलते यदि अन्य जरूरतमंद वर्गों को नुकसान हो रहा है, तो यह नीतिगत असंतुलन है। सरकार को चाहिए कि वह तत्काल इस मामले का संज्ञान ले और निराधार महिलाओं की सहायता राशि को नियमित रूप से सुनिश्चित करे। साथ ही यह भी जरूरी है कि लाडली बहन योजना जैसी योजनाएं सभी महिलाओं को बिना भेदभाव के मिले, ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग को बराबरी से लाभ मिल सके।
जरूरतमंदों की आवाज को नज़रअंदाज़ करना, किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के लिए उचित नहीं। उम्मीद है कि राज्य सरकार इस दिशा में जल्द कोई ठोस कदम उठाएगी।




