चंद्रपुर/राजुरा: चर्चाओं का बाजार इन दिनों गर्म है, और कारण है अवैध रेत खनन का वह नाम जो हर नुक्कड़, हर चौराहे पर गूंज रहा है – ‘पारस’। कहा जा रहा है कि इस पारस की तूती चंद्रपुर और राजुरा विधानसभा क्षेत्र में इस कदर बोलती है कि उस पर कानून भी नतमस्तक नजर आता है।
स्थानीय लोगों की मानें तो अवैध रेत व्यवसाय इन दिनों अपने चरम पर है। धानोरा, पिपरी, वडा और भारोसा के रेती घाटों पर 24 घंटे ट्रैक्टर और हायवा वाहन दौड़ रहे हैं, लेकिन प्रशासन की आंखें जैसे बंद हैं।
सूत्र बताते हैं कि पारस केवल नाम ही नहीं, बल्कि एक ऐसा चेहरा बन चुका है जिसकी जड़ें बेहद मजबूत हैं। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, पूर्व मंत्री हों या वर्तमान विधायक, यहां तक कि संबंधित अधिकारी भी उसके साथ खड़े नजर आते हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि पारस न केवल ग्रामपंचायत का सरपंच और सदस्य रहा है, बल्कि पंचायत समिति, जिला परिषद और तहसील कार्यालयों में भी उसकी पकड़ गहरी है।
यह कोई पहली बार नहीं है जब इस व्यक्ति का नाम अवैध गतिविधियों से जोड़ा गया हो, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी कानून की नजरें जैसे उस पर पड़ ही नहीं रही हैं।
अब सवाल उठता है –
क्या वाकई पारस नामक यह व्यक्ति कानून से ऊपर हो गया है?
क्यों प्रशासन की चुप्पी लगातार बनी हुई है?
क्या कोई बड़ी अनहोनी का इंतजार किया जा रहा है?
इन सारे सवालों के जवाब भविष्य के गर्भ में छिपे हैं, लेकिन फिलहाल इतना तो तय है कि अगर इसी तरह से अवैध रेत खनन चलता रहा और अधिकारी मूकदर्शक बने रहे, तो इसका खामियाजा केवल पर्यावरण ही नहीं, आम नागरिक भी भुगतेंगे।
क्या शासन-प्रशासन जागेगा या चर्चाओं का पारस यूं ही चमकता रहेगा?
पार्ट 1.




