चंद्रपुर : यवतमाल जिला, वणी तालुका के तरोडा (सुंदरनगर) के श्री राम मंदिर परिसर में एक साँप दिखाई देने की सूचना मिलते ही एमएच 29 हेल्पिंग हैंड्स के सर्पमित्र रमेश भादिकर को कॉल किया गया. सूचना मिलते ही वे तुरंत मौके पर पहुंचे और देखा कि यह भारत के चार मुख्य विषैले साँपों में से एक फुरसे (Saw Scaled Viper) था. उन्होंने सावधानीपूर्वक इस साँप को पकड़ा और वहां मौजूद लोगों को इस सांप के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी.
उन्होंने बताया कि फुरसे सांप भारत में पाए जाने वाले वाइपर प्रजाति का सबसे छोटा और विषैला सांप है. इसका मुख्य आहार विंचू (बिच्छू) होता है, लेकिन बिच्छू का शिकार करते समय फुरसे को उसके डंक का भी सामना करना पड़ता है. हालांकि, इस साँप के शरीर में बिच्छू के जहर को सहन करने की क्षमता होती है. हाल के वर्षों में बिच्छुओं की संख्या में कमी आने के कारण फुरसे सांपों की संख्या भी घट रही है. कोकण क्षेत्र में बिच्छू अधिक होने के कारण वहाँ फुरसे सांपों की संख्या ज्यादा पाई जाती है. इस साँप के शरीर पर खवले (स्केल्स) करवत (आरी) के आकार के होते हैं, इसलिए इसे “Saw Scaled Viper” कहा जाता है.
इसके बाद, इस सांप को वन विभाग में पंजीकृत किया गया और वनपरिक्षेत्र अधिकारी के मार्गदर्शन में इसे सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया गया.
इस बचाव कार्य में उपस्थित वन्यजीव रक्षक:
रमेश भादीकर, राजू भोगेकर, अनिकेत कुमरे, नितिन मानुसमारे, समीर गुरनुले, संतोष गुमूलवार, दिवेंद्र भोगेकर, अमोल मांढरे, रोहित सरजत, दीपक, कुणाल, आशीष, दिनेश आदि.




