कोलकाता : कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर एक कवि, लेखक, नाटककार, संगीतकार, चित्रकार, दार्शनिक और समाज सुधारक थे. बंगाली और भारतीय साहित्य और संगीत के साथ-साथ भारतीय कला में उनका योगदान उल्लेखनीय है. उन्होंने देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने में बड़ी अहम भूमिका निभाई. मंगलवार को कवि गुरु रवींद्रनाथ टैगोर की 162वीं जयंती के अवसर पर देश के गृह मंत्री अमित शाह मंगलवार शाम को कोलकाता पहुंचकर साइंस सिटी ऑडिटोरियम में पश्चिम बंगाल की सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था ‘खोला हवा’ द्वारा आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लिए.
खोला हवा की ओर से रवींद्र जयंती के मौके पर संगीत, नृत्य और चर्चा के लिए रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया था. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता के साइंस सिटी ऑडिटोरियम में इस भव्य आयोजन में पहुंचकर अपने अहम विचारों को रखा. शाह ने आधुनिक भारतीय चिंतन पर कवि गुरु के प्रभाव पर कई अहम जानकारी पर प्रकाश डाला.
मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत प्रमुख बंगाली गायकों के स्वागत गीत से हुई. इस मौके पर चंद्रिमा राय ने कवि गुरु टैगोर की सुंदर कविताओं का पाठ किया. उज्जैन मुखर्जी और सोमलता आचार्य की सुरीली आवाज में पेश किए गए रवींद्र संगीत को दर्शकों ने खूब सराहा. अभिनेत्री रितुपर्णा सेनगुप्ता, कोहिनूर सेन बारात, तनुश्री शंकर और उनकी पूरी टीम ने इस मौके पर रंगारंग नृत्य प्रदर्शन कर इस कार्यक्रम में समा बांध दी. नृत्य संगीत कलाओं का प्रदर्शन करनेवालों में बंगाल की कुछ सर्वश्रेष्ठ युवा प्रतिभाओं ने मंत्रमुग्ध कर देने वाला शो प्रस्तुत किया.
खोला हवा के अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. स्वपन दासगुप्ता ने बंगाल के मुक्त समाज में कवि के योगदान के बारे में विस्तृत जानकारियों पर प्रकाश डाला. इस अवसर पर उन्होंने कहा, कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर का बंगाल के साहित्य, कला और संस्कृति के क्षेत्र में योगदान अतुलनीय है.
इस कार्यक्रम में शुभेंदु अधिकारी (पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता), लॉकेट चटर्जी (सांसद), निशित प्रमाणिक (गृह राज्य मंत्री), जॉन बारला (अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री) डॉ. सुकांत मजूमदार (सांसद), डॉक्टर सुभाष सरकार (शिक्षा राज्य मंत्री), शांतनु ठाकुर (जहाजरानी राज्य मंत्री), अग्निमित्रा पाल (विधायक) के साथ खोला हवा टीम की तरफ से डॉ. स्वपन दासगुप्ता, शिशिर बाजोरिया, डॉ. स्वरूप प्रसाद घोष, मल्लिका बनर्जी, बिस्वजीत दास और शंकुदेव पांडा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे. कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम गीत के साथ हुआ.




