(प्रणय कुमार बंडी)
घुग्घुस शहर में आवारा कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि घुग्घुस नगर परिषद प्रशासन इस गंभीर समस्या पर आज भी मौन साधे हुए है। यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि लगातार हो रही घटनाओं की एक और कड़ी है, जो प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है।
आज रविवार देर शाम करीब 6 बजे पंचशील चौक क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां मात्र 12 वर्ष के एक मासूम बच्चे को एक आवारा कुत्ते ने काट लिया। घटना उस समय हुई जब बच्चे के माता-पिता पास की दुकान से सामान खरीद रहे थे। रविवार होने के कारण साप्ताहिक बाजार लगा हुआ था, जिसमें दूरदराज के इलाकों सहित शहर के हजारों नागरिक खरीदारी के लिए मौजूद थे। भीड़-भाड़ वाले इस मार्केट क्षेत्र में कुत्ते द्वारा बच्चे को काटे जाने की घटना ने सभी को स्तब्ध कर दिया।
सवाल यह उठता है कि जब बाजार क्षेत्र के सभी रास्तों पर लोगों की भारी आवाजाही रहती है, तब ऐसी घटनाएं कैसे हो रही हैं? क्या नगर परिषद को इसकी कोई जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?
यह उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी मार्केट लाइन क्षेत्र में अपने ही घर के भीतर खेल रहे एक मासूम बच्चे को कुत्तों ने काटा था। इसके अलावा शहर के विभिन्न हिस्सों में कई नागरिक आवारा कुत्तों के हमले का शिकार हो चुके हैं। इन घटनाओं की खबरें पहले भी अखबारों और सोशल मीडिया में प्रकाशित हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
अब नागरिकों के मन में यह सवाल गहराता जा रहा है कि नगराध्यक्ष, नगर परिषद का आरोग्य विभाग और मुख्याधिकारी आखिर किस घटना का इंतजार कर रहे हैं? क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही प्रशासन जागेगा? क्या आम जनता और बच्चों की सुरक्षा की कोई जिम्मेदारी नगर परिषद की नहीं बनती?
घुग्घुस की जनता अब सिर्फ खबरें नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहती है। आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण, नसबंदी अभियान और बाजार क्षेत्रों में नियमित निगरानी जैसे उपाय तत्काल लागू किए जाने चाहिए। वरना यह कहना गलत नहीं होगा कि प्रशासन की उदासीनता किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है।




