जिम्मेदार लोगों के नाक के नीचे में रोज़ाना हजारों की अवैध वसूली, प्रशासन मौन क्यों?
(प्रणयकुमार बंडी)
सूत्रों की मानें तो चंद्रपुर जिले के घुग्घुस शहर में वणी–घुग्घुस एवं घुग्घुस–वणी मार्ग पर स्थित सुभाषनगर प्वाइंट इन दिनों अवैध वसूली का अड्डा बन चुका है। आरोप है कि यहां कुछ अज्ञात लोग ट्रक चालकों से जबरन 100 से 200 रुपये प्रति वाहन वसूल कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इसी मार्ग से रोज़ाना 500 से अधिक वाहन गुजरते हैं, यानी प्रतिदिन हजारों रुपये की खुली लूट—और सब कुछ पुलिस की “मुस्तैदी” के बीच!
स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, इस वसूली को “एंट्री” के नाम पर अंजाम दिया जा रहा है। नुक्कड़–चौराहों पर यह चर्चा आम हो चुकी है कि बिना पैसे दिए वाहन आगे नहीं बढ़ पाते। सवाल यह है कि जब पुलिस की नियमित गश्त रहती है, तो फिर यह अवैध वसूली किसकी शह पर चल रही है? क्या यह संभव है कि इतने बड़े पैमाने पर हो रही वसूली पुलिस की नजरों से बाहर हो?
सबसे गंभीर सवाल—इस पूरे खेल का मुख्य सूत्रधार कौन है? क्या शासन–प्रशासन के किसी कर्मचारी या प्रभावशाली व्यक्ति के नाम का डर दिखाकर वाहन चालकों को लूटा जा रहा है? अगर नहीं, तो अब तक एक भी गिरफ्तारी क्यों नहीं? क्या यह चुप्पी किसी मिलीभगत की ओर इशारा करती है?
ट्रक चालक पहले से ही महंगे ईंधन, टोल और समयबद्ध डिलीवरी के दबाव में हैं। ऊपर से यह अवैध “एंट्री वसूली” उनकी कमर तोड़ रही है। यह सिर्फ आर्थिक शोषण नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था पर सीधा सवाल है।
अब जनता पूछ रही है— क्या इस मामले की आधिकारिक जांच होगी? क्या सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएंगे? क्या दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी या मामला यूं ही दबा दिया जाएगा?
अगर प्रशासन ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह अवैध वसूली एक संगठित अपराध का रूप ले सकती है। घुग्घुस की जनता और वाहन चालक अब सिर्फ आश्वासन नहीं, नतीजे चाहते हैं।
क्योंकि जब सड़क पर कानून हार जाए, तो जिम्मेदारी तय करना ही असली न्याय होता है।




