“चाय पे चर्चा : अच्छी राय, अच्छा उम्मीदवार… या फिर भ्रमित मतदाता?”
(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस नगर परिषद चुनाव इस साल बेहद दिलचस्प और रोमांचक होने जा रहे हैं। प्रभाग रचना में हुए फेरबदल ने उम्मीदवारों और मतदाताओं दोनों के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। कोई इस बदलाव को विकास के अवसर के रूप में देख रहा है, तो कोई इसे आम जनता के साथ अन्याय मान रहा है।
उम्मीदवारों की चुनौतियाँ
शिवसेना (उद्धव गट) के गणेश उईके का कहना है कि इस बार उम्मीदवारों के सामने बड़ी चुनौती है। प्रभाग बदले जाने से राजनीतिक समीकरणों पर सीधा असर पड़ा है। अब हर उम्मीदवार को नए क्षेत्र और नए मतदाताओं के बीच अपनी पहचान बनानी होगी।
विकास पर फोकस होना चाहिए
सामाजिक कार्यकर्ता मारोती जुमनाके का मानना है कि अब समय केवल राजनीति का नहीं, बल्कि प्रभागवार विकास की दिशा में ठोस चर्चा और काम करने का है। उन्होंने शहर निहाय विकास पर आधारित संवाद की जरूरत बताई।
जनता में भ्रम और नाराज़गी
कांग्रेस के राजकुमार वर्मा ने कहा कि नगर परिषद कार्यालय की स्थापना के चार साल बाद भी चुनाव नहीं हुए और लगातार प्रभाग नंबर बदलने से जनता भ्रमित है। कई वोटर अपने पुराने प्रभाग से हटकर दूसरे क्षेत्र में मतदान करने को उत्सुक नहीं रहते। इसका असर विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भी साफ दिखा है। उन्होंने अधिकारियों से इस पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
मतदाता सूची में गड़बड़ी
सामाजिक कार्यकर्ता शहजाद शेख ने कहा कि नगर परिषद की नई प्रभाग रचना में मतदाता सूचियों में अव्यवस्था है। जिन इलाकों के लोग जहाँ रहते हैं, उनके नाम दूसरे प्रभागों की सूची में दर्ज हो जाते हैं। इससे मतदाता मतदान को लेकर उत्सुक नहीं रहते और उनमें भ्रम की स्थिति बन जाती है। शेख ने चुनाव आयोग से इस पर संज्ञान लेने की मांग की।
स्पष्ट है कि घुग्घुस नगर परिषद चुनाव केवल राजनीतिक संघर्ष तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि यह जनता के विश्वास और प्रशासनिक पारदर्शिता की भी परीक्षा होंगे। प्रभाग बदलने और मतदाता सूची की गड़बड़ी ने चुनाव को और भी पेचीदा बना दिया है। अब देखना यह होगा कि चुनाव आयोग और प्रशासन इन मुद्दों पर क्या कदम उठाता है और उम्मीदवार जनता को कितना भरोसा दिला पाते हैं।





