आज का दिन भारतीय सुरक्षा व्यवस्था के इतिहास में एक विशेष स्थान रखता है। 27 जुलाई 1939 को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (Central Reserve Police Force – CRPF) का गठन किया गया था। तब इसे ‘क्राउन रिप्रजेंटेटिव्स पुलिस’ के नाम से जाना जाता था। आज, यह बल भारत की आंतरिक सुरक्षा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विश्वसनीय अंग बन चुका है।
स्थापना की पृष्ठभूमि:
ब्रिटिश शासन के दौरान जब भारत में राजनैतिक अस्थिरता और बाहरी खतरों की आशंका बढ़ने लगी, तब एक ऐसी फोर्स की जरूरत महसूस की गई जो देश के विभिन्न हिस्सों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम हो। इसी सोच के साथ 1939 में इसकी नींव रखी गई। आजादी के बाद 28 दिसंबर 1949 को इसे संसद के अधिनियम के अंतर्गत ‘केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल’ का नाम दिया गया।
सीआरपीएफ की प्रमुख जिम्मेदारियां:
आंतरिक सुरक्षा बनाए रखना. नक्सल विरोधी अभियानों में सहभागिता. चुनाव के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखना. दंगे, हिंसा और सांप्रदायिक तनाव को नियंत्रित करना. प्राकृतिक आपदाओं और आपातकालीन परिस्थितियों में राहत कार्य.
वीरता और बलिदान की मिसाल:
सीआरपीएफ के जवानों ने समय-समय पर देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। 2001 में संसद पर हमले, 2019 के पुलवामा आतंकी हमले जैसी अनेक घटनाएं इस बल की वीरता और समर्पण की गवाह हैं।
आज का सीआरपीएफ:
वर्तमान में सीआरपीएफ भारत का सबसे बड़ा अर्धसैनिक बल है, जिसमें लाखों की संख्या में पुरुष और महिला जवान कार्यरत हैं। आधुनिक तकनीक, हथियारों और प्रशिक्षण से लैस यह बल हर चुनौती से निपटने के लिए सदैव तत्पर रहता है।
27 जुलाई का दिन हमें याद दिलाता है उस बलिदान, समर्पण और साहस की भावना का, जो केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की पहचान है। यह बल न केवल हमारी आंतरिक सुरक्षा का प्रहरी है, बल्कि राष्ट्र की एकता और अखंडता का भी प्रतीक है। सीआरपीएफ को उसकी वर्षगांठ पर शत्-शत् नमन।




