(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस, चंद्रपुर : नगर परिषद कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी, शासन के स्थानीय प्रतिनिधि होते हैं जिनकी जिम्मेदारी होती है कि वे नगर क्षेत्र में शासकीय नियमों का पालन कराएं और नागरिकों को सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित प्रशासन उपलब्ध कराएं। ऐसे में यह गंभीर सवाल उठता है कि क्या नगर परिषद के कर्मचारी या अधिकारी अवैध शराब की बिक्री पर कार्रवाई कर सकते हैं? और यदि यही अधिकारी स्वयं शराब दुकानों में जाकर नियमों का उल्लंघन करते पाए जाएं, तो उनके खिलाफ कौन और क्या कार्रवाई कर सकता है?
क्या नगर परिषद को है अवैध शराब पर कार्रवाई का अधिकार?
वास्तव में, अवैध शराब की बिक्री पर कार्रवाई करना मुख्य रूप से राज्य के आबकारी विभाग (Excise Department) और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। नगर परिषद का कार्यक्षेत्र नगर नियोजन, सफाई, जल आपूर्ति, भवन अनुज्ञा, टैक्स वसूली आदि होता है। हालांकि, यदि किसी नगर क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री हो रही है और इससे शांति व जनस्वास्थ्य को खतरा उत्पन्न हो रहा है, तो नगर परिषद शिकायत करके संबंधित विभागों को कार्रवाई हेतु सूचित कर सकती है। साथ ही, कुछ मामलों में नगर परिषद की भूमिका सहायक (supportive) रूप में होती है।
यदि नगर परिषद के अधिकारी खुद शराब पीते पाए जाएं तो?
यह एक अत्यंत गंभीर और नैतिक प्रश्न है। अगर कोई शासकीय अधिकारी या कर्मचारी, विशेषकर नगर परिषद के पदाधिकारी, शराब दुकानों में जाकर नियमों का उल्लंघन करते हैं, सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन करते हैं, या अवैध ढंग से चल रहे शराब अड्डों में भागीदारी करते हैं, तो उन पर कई प्रकार की कार्रवाई हो सकती है:
सेवा नियमों का उल्लंघन (Conduct Rules Violation):
शासकीय कर्मचारी आचरण नियमावली (Central/State Government Conduct Rules) के तहत कोई भी कर्मचारी सार्वजनिक स्थानों पर अमर्यादित आचरण नहीं कर सकता। ऐसा आचरण ‘misconduct’ की श्रेणी में आता है।
अनुशासनात्मक कार्रवाई:
इसके लिए मुख्याधिकारी या जिला प्रशासन द्वारा आंतरिक जांच की जा सकती है और संबंधित व्यक्ति को निलंबन, चार्जशीट, स्थानांतरण या सेवामुक्ति तक का सामना करना पड़ सकता है।
आपराधिक मामला:
यदि शराब सेवन किसी अवैध दुकान में किया गया है, या शराब सेवन सार्वजनिक स्थल पर किया गया है, तो भारतीय दंड संहिता और आबकारी अधिनियम की धाराओं के तहत आपराधिक मामला भी दर्ज हो सकता है।
नागरिक क्या कर सकते हैं?
लिखित शिकायत: नागरिक जिलाधिकारी, तहसीलदार, मुख्याधिकारी या पुलिस अधीक्षक को इस संबंध में लिखित शिकायत कर सकते हैं।
RTI (सूचना का अधिकार): संबंधित अधिकारी की ड्यूटी और लोकेशन की जानकारी आरटीआई के तहत मांगी जा सकती है।
मीडिया और जनजागरण: स्थानीय मीडिया और सामाजिक संगठनों के माध्यम से इस पर जनदबाव बनाया जा सकता है।
यदि नगर परिषद का कोई कर्मचारी या अधिकारी स्वयं ही नियमों का उल्लंघन करे, तो यह पूरे प्रशासन की साख पर सवाल उठाता है। ऐसे व्यक्तियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई आवश्यक है ताकि एक उदाहरण प्रस्तुत हो और जनता का प्रशासन पर विश्वास बना रहे। कानून का पालन सिर्फ आम नागरिकों का दायित्व नहीं, बल्कि शासन के हर प्रतिनिधि का कर्तव्य है — विशेषकर जब वह लोकसेवा में हो।




