प्रयागराज, उत्तर प्रदेश —
45 दिनों तक चले भव्य कुंभ मेले में लगभग 66 करोड़ श्रद्धालुओं ने गंगा-यमुना के पवित्र संगम में आस्था की डुबकी लगाई। लेकिन इस श्रद्धा के महासागर के पीछे एक और विरासत रह गई — करीब 30 हज़ार टन कचरा।
प्रशासन ने इस विशाल कचरे को साफ़ करने में गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड तक बना डाला। लेकिन सवाल बना रहा — ये सारा कचरा गया कहां? क्या इसे रिसायकल किया गया, जलाया गया, ज़मीन में गाड़ा गया, या कहीं और भेजा गया?
बीबीसी की ख़ास सिरीज़ #WhyWasteMatters की इस कड़ी में, रिपोर्टर पुनीत बरनाला और विष्णुकांत तिवारी ने इस सवाल के जवाब की तलाश की। उन्होंने प्रयागराज से निकलने वाले कचरे के सफर को GPS ट्रैकर की मदद से ट्रेस किया।
रहस्य खुलता है…
GPS ट्रैकर ने दिखाया कि ये कचरा कई हिस्सों में बंटा। कुछ कूड़ा लैंडफिल साइटों पर पहुंचा, कुछ को नदी किनारे अनौपचारिक ढंग से फेंक दिया गया, जबकि कुछ को कचरा जलाने वाले संयंत्रों (incinerators) में भेजा गया — लेकिन रिसायक्लिंग का हिस्सा बेहद कम था।
प्रदूषण, पारदर्शिता और प्लानिंग की चुनौतियाँ
इस रिपोर्ट से ये भी सामने आया कि ऐसे बड़े आयोजनों में कचरा प्रबंधन की पारदर्शिता और दीर्घकालिक रणनीति की अब भी भारी कमी है। एक ओर धार्मिक आस्था का उत्सव, तो दूसरी ओर पर्यावरणीय बोझ — यह विरोधाभास नीतिगत चिंतन की माँग करता है।
पूरी रिपोर्ट देखें बीबीसी हिंदी की सिरीज़ #WhyWasteMatters में।
शूट और एडिट: रोहित लोहिया




