26 मई भारतीय राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन के रूप में दर्ज है। इसी दिन वर्ष 2014 में नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने भारत के 14वें प्रधानमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली थी। यह वह क्षण था जब देश की जनता ने कांग्रेस के लंबे शासनकाल को विराम देते हुए एक नए नेतृत्व को चुना था — एक ऐसा नेतृत्व जो विकास, पारदर्शिता और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक बनकर उभरा।
2014 का ऐतिहासिक लोकसभा चुनाव
वर्ष 2014 के आम चुनाव भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े और सबसे निर्णायक चुनावों में से एक थे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व में एनडीए को भारी बहुमत प्राप्त हुआ। यह पहली बार था जब भाजपा ने अकेले अपने दम पर लोकसभा में पूर्ण बहुमत हासिल किया। नरेन्द्र मोदी, जो उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे, को देशभर से भरपूर समर्थन मिला।
शपथग्रहण समारोह: एक नया युग शुरू
26 मई 2014 को राष्ट्रपति भवन में भव्य शपथग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर दक्षिण एशिया के कई देशों के प्रमुखों को आमंत्रित किया गया, जिसमें पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी शामिल थे। यह कदम ‘पड़ोसी पहले’ की नीति की ओर एक मजबूत संकेत था।
नरेन्द्र मोदी की नेतृत्व शैली
प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा दिया, जो बाद में ‘सबका विश्वास’ के साथ और भी व्यापक हो गया। उनके कार्यकाल में डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान, मेक इन इंडिया, जन धन योजना, उज्ज्वला योजना जैसे अनेक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शुरू किए गए। विदेश नीति में भी भारत ने एक सशक्त और आत्मविश्वासी राष्ट्र की छवि बनाई।
एक दशक की ओर
आज 26 मई 2025 को नरेन्द्र मोदी को देश का प्रधानमंत्री बने 11 वर्ष पूरे हो चुके हैं। यह यात्रा केवल एक राजनीतिक नेता की नहीं, बल्कि उस जनआंदोलन की है जिसने भारत को एक नई दिशा दी। चाहे वह आर्थिक सुधार हों, राष्ट्रीय सुरक्षा या वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति — हर क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखा गया है।
26 मई का दिन केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भारत के लोकतंत्र की परिपक्वता, जनता की आशाओं और एक नए भारत की नींव रखने का प्रतीक है। नरेन्द्र मोदी का प्रधानमंत्री पद की शपथ लेना भारतीय राजनीति के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ था — जिसने “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की ओर देश की यात्रा को नई गति दी।




