भारतीय संविधान का अनुच्छेद 87 संसद के दोनों सदनों — लोकसभा और राज्यसभा — को राष्ट्रपति द्वारा विशेष अभिभाषण दिए जाने से संबंधित है। यह एक संवैधानिक प्रावधान है जो संसदीय प्रणाली में कार्यपालिका और विधायिका के बीच संबंध को दर्शाता है।
अनुच्छेद 87 का सारांश
अनुच्छेद 87 दो मुख्य बातों को स्पष्ट करता है:
सत्रारंभ पर राष्ट्रपति का अभिभाषण:
हर वर्ष के पहले सत्र की शुरुआत में और हर नए लोकसभा के पहले सत्र की शुरुआत में, राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों को संयुक्त रूप से संबोधित करते हैं। इस अभिभाषण में सरकार की नीतियों, योजनाओं और भावी कार्यक्रमों की जानकारी दी जाती है। यह परंपरा सरकार के कार्यों और दृष्टिकोण को जनता के प्रतिनिधियों के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करती है।
प्रक्रिया और अधिकार:
संसद इस विशेष अभिभाषण की प्रक्रिया और उसके जवाब को नियंत्रित करने वाले नियम बना सकती है। इसका अर्थ है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण के उत्तर पर बहस की जा सकती है और उस पर प्रस्ताव पारित किया जा सकता है।
महत्व
यह अभिभाषण सरकार की नीतियों की रूपरेखा प्रस्तुत करता है। राष्ट्रपति का अभिभाषण संसदीय वर्ष का मार्गदर्शन करता है। इससे सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलता है।
अनुच्छेद 87 भारतीय लोकतंत्र की उस भावना को पुष्ट करता है जिसमें कार्यपालिका को विधायिका के प्रति जवाबदेह ठहराया गया है। राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संवाद की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।




