घुग्घुस : पिछले तीन से चार साल में शहर के कई वार्डों में कई गार्डन बनाए गए हैं. जो सुंदर और आकर्षण के गार्डन है. इन में से एक गार्डेन में बीते रात को तिलक नगर में गार्डेन का बांस और लोहे से बना एक शेड ताश के पत्ते की तरह धराशायी हो गया, इसे किस्मत कहें, बच्चे वहां नहीं खेल रहे थे और सीनियर सिटीजन वहां बैठे हुए नही थे. जिससे एक बड़ी जानहानि होने से बच गई.
पिछले दो साल से कोरोना काल में इस गार्डन का उपयोग नहीं हो पाया था. हालांकि जनता के टैक्स से बने इस गार्डन की निर्माण लागत करोड़ों रुपये में है. इस निर्माण कार्य में लाखों रुपये का भ्रष्टाचार किया गया है और घूस लेकर घटिया गुणवत्ता के काम पर आंख मूंद लिया गया है ऐसी चर्चा तूल पकड़ रहा है. लेकिन इसका खामियाजा नागरिकों को भुगतना पड़ता है.
घुग्घुस नगर परिषद कार्यालय अंतर्गत तिलक नगर स्थित लोकमान्य तिलक उधान में शिलान्यास के अनुसार लोक निर्माण विभाग क्रमांक 1 चंद्रपुर द्वारा प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के तहत खुली स्थल का सौंदर्यीकरण किया गया. जिसकी कीमत 53.80 लाख रुपए है. यह काम 03/06/2017 को शुरू किया गया था. इस कार्य के ठेकेदार का नाम एम.एस. भंडारकर नागपुर से हैं. यह कार्य सुधीर मुनगंटीवार (पूर्व वित्त मंत्री, महाराष्ट्र राज्य) के माध्यम से अनुमोदित किया गया था. मुनगंटीवार द्वारा 15/08/2020 को इस उद्यान का उद्घाटन किया गया. उस समय मुख्य रुप से भाजपा जिलाध्यक्ष देवराव भोंगले, नीतू चौधरी (सभापति जी. पा, चंद्रपूर), निरीक्षण तांड्रा( उपसभापति, प.स.), रंजिता आगदारि (प.स.सदस्य), संतोष नुने (ग्रामपंचायत सदस्य) और गांव के लोग उपस्थित थे.
तिलक नगर निवासी सुद्दला रामुलू की माने तो ऊपर में पाइप और बंबू से एक शेड का निर्माण किया गया है. जो अब सड़ कर रात 12 बजे गिर गया है. जिसमें किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ है. वहीं कुछ लोगों ने बगीचे में लगे सागौन को काट डाला है. बगीचा सूख गया है. यह किसकी ध्यान नहीं है?
सीनियर सिटिजन श्यामराव बोबडे का मानना है कि घुग्घुस में कई गार्डन बनाए गए हैं. जिन के तरफ किसी का ध्यान नहीं है. जब मैं इस बगीचे में आया तो मैंने देखा कि एक छप्पर गिरा हुआ था. जब उन्होंने गौर से देखा तो उन्हें पता चला कि इस शेड के खंभे चार चार बांस के बने हैं. क्योंकि छत लोहे की बनी है. इस काम पर सरकारी पैसा खर्च किया गया. सरकार का पैसा मतलब हमारा पैसा है. हमारे पैसे पर विभिन्न तरीकों से कर लगाया जाता है. उस पैसे का क्या फायदा अगर वह ठीक से काम ही न करे. इन कार्यों का उद्देश्य क्या है? जैसे कई सवाल खड़े किए है.




