प्रणयकुमार बंडी
घुग्घूस, चंद्रपुर : गणेशोत्सव केवल उत्सव नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और भावनाओं से जुड़ा पर्व है। घुग्घूस में 28 सितंबर 2026 की शाम गणेश विसर्जन के अवसर पर निकाली गई भव्य शोभायात्रा में भी श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला। शासन-प्रशासन की मौजूदगी में निकली इस शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा।

शोभायात्रा में ‘शिव तांडव’ का भव्य एवं रोमांचकारी दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। शिव तांडव की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा और धार्मिक वातावरण को और अधिक जीवंत बना दिया।
‘गजराज’ को लेकर बढ़ी उत्सुकता
शोभायात्रा की भव्यता बढ़ाने के लिए केरल से हाथी लाए जाने की जानकारी और प्रचार के कारण लोगों में विशेष उत्सुकता दिखाई दी। बड़ी संख्या में नागरिक इस आकर्षण को देखने के लिए भी पहुंचे। हाथी की मौजूदगी को शोभायात्रा का प्रमुख आकर्षण बताया गया।
हालांकि, शोभायात्रा के दौरान हाथी को लेकर कुछ नागरिकों में नाराजगी और तीखी प्रतिक्रिया भी देखने को मिली। कुछ लोगों ने इसे वास्तविक हाथी के बजाय डुप्लीकेट/कृत्रिम प्रस्तुति बताया। इस दावे को लेकर नागरिकों के बीच चर्चा और असंतोष की स्थिति बनी रही।

आस्था के साथ भरोसा भी जरूरी
धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालु आयोजकों के प्रचार और घोषणाओं पर विश्वास करके कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। ऐसे में नागरिकों का कहना रहा कि आस्था के साथ भरोसा और पारदर्शिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि किसी विशेष आकर्षण के नाम पर लोगों को आमंत्रित किया जाता है, तो उसके संबंध में स्पष्ट और सही जानकारी देना आयोजकों की जिम्मेदारी होनी चाहिए।
गणेशोत्सव की मूल भावना श्रद्धा, विश्वास, सामाजिक एकता और सकारात्मक संदेश में निहित है। किसी भी धार्मिक आयोजन की भव्यता तभी सार्थक मानी जाती है, जब उसके साथ नागरिकों के विश्वास का भी सम्मान हो।
घुग्घूस की इस विसर्जन शोभायात्रा में श्रद्धालुओं ने गणराय को भावपूर्ण विदाई दी और अगले वर्ष फिर से बप्पा के आगमन की कामना की। वहीं, ‘गजराज’ को लेकर उठी चर्चाओं ने यह संदेश भी दिया कि आस्था के साथ लोगों के विश्वास और भावनाओं का सम्मान करना किसी भी सार्वजनिक धार्मिक आयोजन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।




