Monday, September 28, 2026

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केरल से घुग्घूस तक गजराज की एंट्री: गणेश विसर्जन मिरवणूक में हाथी की मौजूदगी पर वन्यजीव संरक्षण और प्रशासन की जिम्मेदारी क्या?

28 सितंबर को गांधी चौक में शाम 5 बजे कार्यक्रम; हाथी की मौजूदगी के बीच अनुमति, स्वास्थ्य प्रमाणपत्र और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

— प्रणयकुमार बंडी

घुग्घूस/चंद्रपुर : गणेशोत्सव के समापन अवसर पर 28 सितंबर 2026, सोमवार को घुग्घूस के गांधी चौक में शाम 5 बजे गणेश विसर्जन मिरवणूक का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम की जानकारी के अनुसार केरल से गजराज को घुग्घूस लाने के साथ भव्य महाअवतार नरसिंम्हा ग्रुप भी कार्यक्रम में सहभागी होगा।

हाथी भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में विशेष स्थान रखता है, लेकिन जब किसी कैप्टिव (बंदी/पालित) हाथी को एक राज्य से दूसरे राज्य में सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए ले जाया जाता है, तो उसके साथ कई कानूनी और वन्यजीव संरक्षण संबंधी जिम्मेदारियां जुड़ जाती हैं।

ऐसे में सवाल केवल यह नहीं है कि गजराज घुग्घूस पहुंचेंगे या नहीं, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि क्या उसके अंतरराज्यीय परिवहन, स्वास्थ्य, पहचान, महावत, कार्यक्रम में उपयोग और सार्वजनिक सुरक्षा से संबंधित सभी आवश्यक अनुमतियां और प्रमाणपत्र मौजूद हैं?

वन्यजीव संरक्षण कानून में हाथी कोई सामान्य ‘कार्यक्रम सामग्री’ नहीं

भारत के Wild Life (Protection) Act, 1972 में कैप्टिव हाथियों के स्वामित्व और उनके अंतरराज्यीय परिवहन के लिए विशेष प्रावधान हैं। कानून के अनुसार वैध Ownership Certificate रखने वाले कैप्टिव हाथी के परिवहन पर केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तें लागू होती हैं।

विशेष रूप से Captive Elephant (Transfer or Transport) Rules, 2024 लागू हैं। इन नियमों में हाथी को एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाने की प्रक्रिया, वन विभाग की जांच, पशु चिकित्सकीय प्रमाणपत्र तथा Chief Wildlife Warden स्तर की अनुमति का प्रावधान किया गया है।

इसलिए यदि कोई हाथी केरल से महाराष्ट्र और आगे चंद्रपुर जिले के घुग्घूस नगर परिषद क्षेत्र में किसी धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए आता है, तो उसके परिवहन की वैधता और निर्धारित शर्तों की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

केरल से महाराष्ट्र तक कैसे होगा सफर?

केरल से चंद्रपुर की दूरी काफी लंबी है। ऐसे अंतरराज्यीय सफर में हाथी को सामान्य यात्री वाहन की तरह सड़क पर लेकर आना संभव नहीं माना जा सकता। परिवहन के लिए विशेष नियमों और अनुमति की आवश्यकता होती है।

2024 के केंद्रीय नियमों में परिवहन आवेदन में हाथी की पहचान, माइक्रोचिप, स्वामित्व प्रमाणपत्र, आयु, लिंग, वर्तमान आवास, गंतव्य, यात्रा का उद्देश्य तथा साथ जाने वाले महावत और Elephant Assistant जैसी जानकारियां शामिल होती हैं। परिवहन परमिट में यात्रा के स्थान और अवधि का भी उल्लेख किया जाता है।

इसके अलावा हाथी के लिए पशु चिकित्सक का स्वास्थ्य प्रमाणपत्र आवश्यक है। परिवहन के दौरान हाथी को पर्याप्त भोजन-पानी उपलब्ध कराने और निर्धारित सुरक्षा शर्तों का पालन करना भी जरूरी है।

अर्थात केरल → महाराष्ट्र → चंद्रपुर जिला → घुग्घूस तक का सफर केवल आयोजक की व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि संबंधित वन्यजीव अधिकारियों के नियमन और निगरानी का भी विषय है।

महाराष्ट्र में प्रवेश के बाद प्रशासन की क्या भूमिका?

महाराष्ट्र की सीमा में प्रवेश करने के बाद भी मामला समाप्त नहीं होता। अंतरराज्यीय परिवहन के लिए संबंधित राज्यों के Chief Wildlife Warden और क्षेत्रीय वन अधिकारियों की भूमिका निर्धारित है।

2024 के नियमों के अनुसार अंतरराज्यीय मामले में donor State और recipient State के Chief Wildlife Warden के बीच प्रक्रिया होती है तथा संबंधित क्षेत्र के Deputy Conservator of Forests द्वारा भी आवश्यक जांच की जाती है।

इसलिए चंद्रपुर जिले में पहुंचने के बाद संबंधित वन विभाग के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि:

  • हाथी के पास वैध Ownership Certificate है या नहीं।
  • माइक्रोचिप/पहचान संबंधी दस्तावेज उपलब्ध हैं या नहीं।
  • अंतरराज्यीय Transport Permit वैध है या नहीं।
  • पशु चिकित्सक का Fitness/Health Certificate मौजूद है या नहीं।
  • यात्रा निर्धारित स्थान और अवधि के भीतर हो रही है या नहीं।
  • महावत और Elephant Assistant की व्यवस्था है या नहीं।
  • हाथी के लिए भोजन, पानी और विश्राम की उचित व्यवस्था है या नहीं।
  • हाथी की स्थिति ऐसी तो नहीं कि वह सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए अनुपयुक्त हो।
  • कार्यक्रम स्थल पर भीड़, रोशनी, पटाखे, तेज संगीत और वाहनों से हाथी की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था है या नहीं।

घुग्घूस नगर परिषद और पुलिस की भी जिम्मेदारी

गणेश विसर्जन मिरवणूक का आयोजन केवल वन विभाग से संबंधित विषय नहीं है।

गांधी चौक और आसपास के क्षेत्र में बड़ी संख्या में नागरिकों की मौजूदगी की संभावना को देखते हुए नगर परिषद, पुलिस प्रशासन, यातायात पुलिस, राजस्व प्रशासन और वन विभाग के बीच समन्वय आवश्यक है।

हाथी जैसे विशाल और संवेदनशील वन्यजीव की मौजूदगी में भीड़ नियंत्रण, वाहन व्यवस्था, आपातकालीन मार्ग, बिजली के तारों की स्थिति, मंच एवं स्वागत द्वार की ऊंचाई, पटाखों पर नियंत्रण तथा आकस्मिक स्थिति में हाथी और नागरिकों को अलग करने की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

विशेषकर विसर्जन मिरवणूक में ढोल-ताशे, डीजे, आतिशबाजी, भीड़ और अचानक होने वाली आवाजें मौजूद हो सकती हैं। इसलिए हाथी के व्यवहार और तनाव के संभावित जोखिम को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण और सुरक्षा योजना बनाना उचित होगा।

हाथी को ‘दिखावे’ के बजाय कल्याण के दृष्टिकोण से देखना जरूरी

Animal Welfare Board of India की आधिकारिक जानकारी में हाथियों के लिए दस्तावेज, Movement Register, Feeding Register, Disease/Treatment Record, Vaccination Record और Work Register जैसे रिकॉर्ड का उल्लेख है। बोर्ड की वेबसाइट पर Processions और अन्य Events में हाथियों के संबंध में अलग व्यवस्था/पंजीकरण की जानकारी भी उपलब्ध है।

इसका अर्थ यह है कि धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम में हाथी की मौजूदगी को केवल आकर्षण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उसके स्वास्थ्य, आराम, सुरक्षा और मानवीय व्यवहार को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

केरल के नियम भी परिवहन में स्वास्थ्य और सुरक्षा पर जोर देते हैं

केरल के Captive Elephant Management and Maintenance Rules में भी हाथी के परिवहन के लिए अनुमति, पशु चिकित्सकीय फिटनेस प्रमाणपत्र, भोजन-पानी, यात्रा के दौरान विश्राम और परिवहन वाहन से संबंधित सुरक्षा मानकों का उल्लेख है।

इसलिए आयोजकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे यह सुनिश्चित करें कि केरल से हाथी को रवाना करने से पहले और महाराष्ट्र में प्रवेश के बाद सभी आवश्यक दस्तावेज और अनुमतियां उपलब्ध हों।

प्रशासन से पारदर्शिता की अपेक्षा

घुग्घूस में गणेश विसर्जन मिरवणूक धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का महत्वपूर्ण अवसर है। ऐसे में यदि कार्यक्रम में केरल से गजराज लाया जा रहा है तो प्रशासन द्वारा नागरिकों को यह जानकारी सार्वजनिक करना पारदर्शिता की दृष्टि से उपयोगी होगा कि:

हाथी के परिवहन की अनुमति किस सक्षम अधिकारी ने दी? उसका Ownership Certificate और Microchip विवरण सत्यापित किया गया है या नहीं? Veterinary Fitness Certificate कब जारी हुआ? अंतरराज्यीय Transport Permit की अवधि क्या है? महाराष्ट्र और चंद्रपुर वन विभाग को इसकी सूचना दी गई है या नहीं? गांधी चौक कार्यक्रम के लिए पशु कल्याण एवं सार्वजनिक सुरक्षा की क्या व्यवस्था की गई है? इन सवालों का उद्देश्य किसी धार्मिक कार्यक्रम का विरोध करना नहीं, बल्कि आस्था के साथ वन्यजीव संरक्षण और नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

आस्था भी रहे, वन्यजीव संरक्षण भी

गणपति बप्पा को विदाई देने के अवसर पर गजराज की उपस्थिति निश्चित रूप से लोगों के लिए आकर्षण का विषय हो सकती है। लेकिन हाथी स्वयं भी एक जीवित, संवेदनशील और संरक्षित वन्यजीव है।

इसलिए “बप्पा को सम्मानजनक विदाई और गजराज की सुरक्षित मौजूदगी”—दोनों उद्देश्यों के बीच संतुलन बनाना प्रशासन और आयोजकों की साझा जिम्मेदारी है।

28 सितंबर को गांधी चौक में होने वाले कार्यक्रम से पहले यदि संबंधित विभाग दस्तावेजों, स्वास्थ्य प्रमाणपत्र, परिवहन अनुमति, मार्ग, कार्यक्रम स्थल और सुरक्षा व्यवस्था की विधिवत जांच कर लेते हैं, तो धार्मिक उत्सव के साथ वन्यजीव संरक्षण और कानून के पालन का भी सकारात्मक संदेश दिया जा सकता है।

आस्था के उत्सव में नियमों का पालन ही वास्तविक जिम्मेदारी है।

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Pranaykumar Bandi

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