चंद्रपुर, महाराष्ट्र : चंद्रपुर जिले के चिमूर तहसील स्थित नेरी गांव का प्राचीन शिव मंदिर विदर्भ की समृद्ध धार्मिक, ऐतिहासिक और स्थापत्य विरासत का एक अनमोल उदाहरण है। लगभग 12वीं शताब्दी का यह मंदिर अपनी प्राचीन पत्थर की संरचना, बारीक नक्काशी और विशिष्ट स्थापत्य शैली के कारण श्रद्धालुओं के साथ-साथ इतिहास एवं पुरातत्व प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
मंदिर की स्थापत्य शैली में चालुक्यकालीन तथा हेमाडपंथी वास्तुकला का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। पूर्वाभिमुख इस मंदिर में मुखमंडप, अर्धमंडप, सभामंडप, अंतराल और गर्भगृह जैसी विशिष्ट संरचनाएं हैं। मंदिर के पत्थर के स्तंभों और बाहरी दीवारों पर अत्यंत सुंदर एवं सूक्ष्म शिल्पकारी देखने को मिलती है।
मंदिर की बाहरी दीवारों पर नटराज, नृत्य करते गणेश, सरस्वती, पार्वती, हनुमान, भैरव, महिषासुरमर्दिनी और चामुंडा जैसी देवी-देवताओं की आकर्षक प्रतिमाएं उकेरी गई हैं। इसके अलावा अप्सराओं, नृत्यांगनाओं और संगीत वाद्य बजाते कलाकारों की शिल्पाकृतियां भी मंदिर की कलात्मक सुंदरता को और समृद्ध करती हैं। इन शिल्पों के माध्यम से तत्कालीन कलाकारों की अद्भुत प्रतिभा तथा उस समय के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन की झलक मिलती है।
नेरी के इस मंदिर की विशेषता केवल इसकी स्थापत्य कला तक सीमित नहीं है। मंदिर परिसर में किए गए उत्खनन के दौरान दो प्राचीन शिवलिंग मिलने की भी जानकारी मिलती है। इससे इस क्षेत्र में प्राचीन काल से चली आ रही शिव उपासना और धार्मिक परंपरा की ऐतिहासिक महत्ता और अधिक स्पष्ट होती है।
नेरी का यह प्राचीन शिव मंदिर आज भी श्रद्धा और इतिहास का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है। यह केवल पूजा-अर्चना का धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि विदर्भ के प्राचीन इतिहास, स्थापत्यकला और शिल्प परंपरा का जीवंत स्मारक है।
चंद्रपुर जिले के ऐतिहासिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थलों की यात्रा करने वाले पर्यटकों और प्राचीन वास्तुकला में रुचि रखने वाले लोगों के लिए नेरी का यह प्राचीन शिव मंदिर निश्चित रूप से दर्शनीय स्थल है।





