प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर | औद्योगिक नगरी के रूप में पहचान रखने वाले घुग्घुस में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सोशल मीडिया और पत्राचार के माध्यम से बार-बार मांग उठने के बावजूद यहां का अस्पताल आज तक शुरू नहीं हो पाया है। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल की इमारत पूरी तरह तैयार है, लेकिन सरकारी उदासीनता और तकनीकी बहानों के कारण जनता को इसका लाभ नहीं मिल रहा।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अस्पताल शुरू न होने के पीछे प्रशासन की लापरवाही साफ झलकती है। भोगवटा प्रमाणपत्र (Occupancy Certificate), अग्निशमन विभाग का NOC, स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और विद्युत सुरक्षा जैसे जरूरी प्रमाणपत्र आज भी लंबित हैं क्या। सवाल यह उठता है कि जब इमारत तैयार हो चुकी है, तो ये बुनियादी प्रक्रियाएं अब तक पूरी क्यों नहीं की गईं?
घुग्घुस एक बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है, जहां प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। यहां के नागरिक सांस, त्वचा और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। इसके बावजूद सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता में स्वास्थ्य सुविधाएं नजर नहीं आतीं। किसी भी आपात स्थिति या दुर्घटना में मरीजों को चंद्रपुर ले जाना पड़ता है, जिससे कई बार समय पर इलाज न मिलने से जान का खतरा बढ़ जाता है।
राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर गंभीरता का अभाव साफ दिखाई देता है। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि अब इस अहम मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठे हैं। जनता के स्वास्थ्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ आखिर कब तक चलता रहेगा?
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी आवश्यक प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया को तत्काल पूरा कर ग्रामीण अस्पताल को जल्द से जल्द शुरू किया जाए। यह केवल एक भवन का उद्घाटन नहीं, बल्कि हजारों लोगों के जीवन से जुड़ा गंभीर मामला है।




