प्रो. जयंत विष्णु नारळीकर को मरणोपरांत ‘विज्ञान रत्न’ से सम्मान
नई दिल्ली – भारत सरकार की ओर से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिए जाने वाले राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार–2025 का वितरण आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में किया गया। देश के विख्यात खगोल भौतिकशास्त्री स्व. प्रो. जयंत विष्णु नारळीकर को सर्वोच्च सम्मान ‘विज्ञान रत्न’ से मरणोपरांत सम्मानित किया गया। उनकी ओर से यह पुरस्कार आईयूसीएए के निदेशक डॉ. रघुनाथन श्री आनंद ने स्वीकार किया।
कार्यक्रम में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वैज्ञानिकों, प्रौद्योगिकीविदों और शोधकर्ताओं को विज्ञान रत्न, विज्ञान श्री, विज्ञान युवा और विज्ञान टीम – इन चार श्रेणियों में सम्मानित किया गया।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के किसी भी क्षेत्र में आजीवन योगदान के लिए दिया जाने वाला विज्ञान रत्न पुरस्कार स्व. प्रो. जयंत विष्णु नारळीकर को प्रदान किया गया। उन्होंने ‘हॉयल–नारळीकर सिद्धांत’ विकसित कर गुरुत्वाकर्षण और पदार्थ सृजन के एकीकरण पर आधारित स्थिर अवस्था ब्रह्मांड की संकल्पना प्रस्तुत की थी। साथ ही ‘क्वासी-स्टेडी स्टेट कॉस्मोलॉजी’ मॉडल के माध्यम से कॉस्मिक बैकग्राउंड रेडिएशन और आकाशगंगाओं की उत्पत्ति का वैज्ञानिक स्पष्टीकरण दिया।
विज्ञान श्री पुरस्कार के अंतर्गत नागपुर स्थित राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (NEERI) के निदेशक डॉ. एस. वेंकट मोहन को पर्यावरण विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य के लिए कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों को विज्ञान श्री पुरस्कार प्रदान किए गए, जिनमें— परमाणु ऊर्जा क्षेत्र (न्यूट्रॉन बीमलाइन्स और सुपरकंडक्टिविटी) में डॉ. यूसुफ मोहम्मद शेख (BARC, मुंबई), कृषि विज्ञान में डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह (ICAR–नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेस, नई दिल्ली), जीव विज्ञान में मानव जीनोम सीक्वेंसिंग द्वारा रोग संवेदनशीलता और इतिहास पर शोध के लिए डॉ. कुमारसामी थंगराज (CSIR–CCMB, हैदराबाद), रसायन विज्ञान में सस्ती जल शुद्धिकरण तकनीक विकसित करने के लिए प्रो. तलप्पिल प्रदीप (IIT मद्रास), इंजीनियरिंग विज्ञान में प्रो. अनिरुद्ध भालचंद्र पंडित, गणित एवं कंप्यूटर विज्ञान में प्रो. महान एम.जे., और अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में जयन एन. शामिल हैं।
विज्ञान युवा पुरस्कार के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों के युवा शोधकर्ताओं को सम्मानित किया गया। इनमें भौतिकी में प्रो. अमित कुमार अग्रवाल और प्रो. सुहृद श्रीकांत मोरे, गणित एवं कंप्यूटर विज्ञान में प्रो. सब्यसाची मुखर्जी और प्रो. श्वेता प्रेम अग्रवाल, अभियांत्रिकी विज्ञान में प्रो. आर्कप्रभा बासू, चिकित्सा क्षेत्र में डॉ. सुरेश कुमार, अंतरिक्ष विज्ञान में अंकुर गर्ग, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार में प्रो. मोहनशंकर शिवप्रकाशम, कृषि विज्ञान में डॉ. जगदीस गुप्ता कपुगंती और डॉ. सतेंद्र कुमार मंगरौठिया, जैविक विज्ञान में देबार्का सेनगुप्ता और डॉ. दीपा अगाशे, रसायन विज्ञान में डॉ. दिब्येंदु दास, तथा पृथ्वी विज्ञान में डॉ. वलीउर रहमान का समावेश है।
इसके अलावा अरोमा मिशन टीम को सुगंधित फसलों की उच्च उत्पादक किस्में विकसित कर किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान के लिए विज्ञान टीम पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
यह समारोह भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी प्रगति को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।




