(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस, चंद्रपुर — नगर परिषद चुनाव 2025 के अचानक स्थगित होने की चर्चाओं ने घुग्घुस शहर में राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। आधिकारिक घोषणा न होने के बावजूद पूरे शहर में अफवाहों का दौर तेज है, जिससे उम्मीदवारों और मतदाताओं दोनों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।
सुबह से ही नगर परिषद परिसर में उम्मीदवारों, उनके समर्थकों और परिजन की भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई यही जानना चाहता था कि चुनाव वास्तव में स्थगित हुए हैं या नहीं। लेकिन अधिकारियों की अनुपस्थिति ने स्थिति और अधिक गंभीर बना दी। लोग सवाल उठा रहे हैं कि इतनी बड़ी चुनावी प्रक्रिया में जिम्मेदार अधिकारी ही मौजूद न हों, यह स्वयं चुनाव व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।
उम्मीदवारों का आरोप है कि यदि चुनाव स्थगित करना ही था, तो इसकी सूचना पहले ही दी जानी चाहिए थी। कई उम्मीदवारों ने कहा कि उन्होंने प्रचार पर लाखों रुपये खर्च किए हैं, कार्यकर्ता जुटाए हैं, घर-घर जाकर मतदाता संपर्क किया है—ऐसे में अचानक अनिश्चितता पैदा करना अनुचित है।
कुछ का कहना है कि चुनावी व्यवस्थाओं में शुरू से ही कई कमियां थीं, जिन्हें नज़रअंदाज़ किया गया, और अब राजनीतिक दबाव के चलते स्थगन की बात आगे लाई जा रही है।
शहर में यह भी चर्चा है कि 2 दिसंबर 2025 को चुनाव होने की नई संभावना जताई जा रही है, लेकिन जब तक आधिकारिक आदेश जारी नहीं होता, तब तक किसी भी दावे पर भरोसा करना मुश्किल है।
जनता का सवाल सरल है—

आखिर चुनाव व्यवस्था में इतनी अराजकता क्यों? अधिकारियों ने स्पष्ट सूचना क्यों नहीं दी? क्या पूरी प्रक्रिया राजनीतिक खींचतान का शिकार हो चुकी है?
अब शहर की निगाहें शाम तक आने वाली संभावित सूचना पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि उम्मीदवारों को राहत भरी “चुनाव जारी” की खबर मिलेगी या फिर निराशाजनक “चुनाव स्थगित” का आदेश। फिलहाल घुग्घुस का चुनावी माहौल संशय और अव्यवस्था से घिरा हुआ है।




