(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस (चंद्रपुर) – कामगारों और किसानों की लंबित मांगों को लेकर जारी आंदोलन अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। रोजगार और बकाया वेतन की मांग को लेकर 8 किसानों ने शनिवार तड़के सुबह टावर (चिमनी) पर चढ़कर आंदोलन शुरू कर दिया। इससे आंदोलन की तीव्रता और अधिक बढ़ गई है।
संगठन के महासचिव महेंद्र मारोती वडसकर ने बताया कि “कामगारों का बकाया वेतन, सेवा सुविधाएँ और रोजगार की गारंटी देना प्रशासन की जिम्मेदारी है।” उन्होंने कहा कि 18 अगस्त 2025 से प्रोजेक्ट स्तर पर आंदोलन तेज किया गया, जिसमें किसानों, प्रोजेक्ट प्रभावितों और कामगारों का व्यापक समर्थन मिला।
इस आंदोलन में अब आंदोलनकारियों के परिजन और बच्चे भी मंडप में बैठकर समर्थन कर रहे हैं। संगठन ने पहले ही स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि तय समयसीमा में प्रशासन ने ठोस निर्णय नहीं लिया तो जिला कार्यालय के सामने बड़े पैमाने पर धरना आंदोलन किया जाएगा।
7 मई 2025 को पूर्व कामगारों और किसानों ने जिलाधिकारी कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर बकाया अधिकारों और बेरोजगारी की समस्या पर त्वरित कार्यवाही की मांग की थी।
संगठन का आरोप है कि वर्ष 2012-13 से प्रोजेक्ट का कामकाज बंद है और 2017 में कंपनी NCLT के अंतर्गत आने के बाद भी स्थायी कामगारों की मांगों का समाधान नहीं किया गया।
कंपनी प्रबंधन की लापरवाही के कारण कई कामगार बेरोजगार हो गए हैं और किसान प्रभावितों को भी मुआवजा नहीं मिला है।
मुख्य मांगें
कामगारों का बकाया वेतन और सेवा सुविधाएँ अदा की जाएं। बेरोजगार कामगारों को पुनः रोजगार दिया जाए। किसानों और प्रोजेक्ट प्रभावितों को उचित मुआवजा मिले। पुराने प्रोजेक्ट का पुनरुद्धार कर रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएं।
आंदोलन की इस नई रूपरेखा से शासन-प्रशासन की नीतियों पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब जिला और प्रोजेक्ट प्रशासन की अगली कार्यवाही पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।





