प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस (चंद्रपुर) – शहर की राजनीति में इन दिनों भारतीय जनता पार्टी के शहर अध्यक्ष पद को लेकर गहमा-गहमी का माहौल बना हुआ है। कभी ‘वन मैन आर्मी’ माने जाने वाली भाजपा आज अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी के दौर से गुजर रही है। पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार, विधायक देवराव भोंगले, पूर्व केंद्रीय मंत्री हंसराज अहीर और विधायक किशोर जोरगेवार जैसे बड़े नेताओं के खेमे भी अब स्पष्ट रूप से उभरने लगे हैं।
बदलता खेमा, बदलते समीकरण
पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच पाला बदलने का सिलसिला भी जारी है। पहले मुनगंटीवार खेमे से जुड़े रहे कई पदाधिकारी अब जोरगेवार के करीब नजर आ रहे हैं। इस बदलाव के पीछे राजनीतिक महत्वाकांक्षा, संभावित टिकट की उम्मीद और व्यक्तिगत फायदे जैसे कारण बताए जा रहे हैं।
शहर अध्यक्ष पद को लेकर नेतृत्व परिवर्तन की मांग जोर पकड़ रही है। कार्यकर्ताओं के एक वर्ग द्वारा यह मांग उठाई जा रही है कि संगठन को नया चेहरा दिया जाए। इस खींचतान के बीच कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा संगठन में जल्द ही बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।
अध्यक्ष पद की रेस में ये चेहरे आगे
भाजपा के नए शहर अध्यक्ष की रेस में कई नाम सामने आ रहे हैं, जिनमें से प्रत्येक की अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि और सामाजिक पकड़ है:
अनिल बाम: व्यापारी, कॉन्ट्रैक्टर और समर्पित कार्यकर्ता; नेतृत्व क्षमता उनकी विशेषता।
श्याम आगदारी: 40 वर्षों से भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यों में सदैव आगे, पद की कोई लालसा नहीं, पार्टी के प्रति समर्पित।
साजन गोहने: वार्ड क्रमांक 6 से पूर्व ग्रामपंचायत सदस्य, सामाजिक कार्यों में सक्रिय।
निरीक्षण तांड्रा: पूर्व में कांग्रेस में थे, भाजपा में आकर पंचायत समिति उपसभापति तक का सफर तय किया, घुग्घुस नगर परिषद की मांग को लेकर पद तक त्यागा।
इमरान खान: यंग चांदा ब्रिगेड के माध्यम से सामाजिक कार्यों में सक्रिय, जोरगेवार के करीबी माने जाते हैं।
संतोष नुने: प्रभारी सरपंच पद संभाल चुके हैं, जनसेवा में रुचि रखने वाले परिवार से आते हैं।
महेश लट्टा: कांग्रेस से भाजपा में आए युवा नेता, ग्रामपंचायत सदस्य रहे हैं, सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय।
संजय तिवारी: पूर्व उपसरपंच, हंसराज अहीर के करीबी, जनसेवा में सक्रिय भूमिका।
अमोल थेरे: जमीनी कार्यकर्ता, देवराव भोंगले और विवेक बोडे के करीबी माने जाते हैं।
राजकुमार गोडशेलवर: पूर्व सरपंच, मेहनती और स्वाभिमानी कार्यकर्ता, जमीनी जुड़ाव गहरा।
पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती – एकता बनाए रखना
आगामी नगरपरिषद चुनाव से पहले भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती कार्यकर्ताओं की एकजुटता बनाए रखने की है। वर्तमान नेतृत्व पर असंतोष, गुटबाजी और नई नेतृत्व की मांग ने पार्टी की रणनीति को प्रभावित किया है। यदि यह संघर्ष समय रहते नहीं सुलझाया गया, तो इसका सीधा असर पार्टी के चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
अब आगे क्या?
अब सबकी नजरें भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर टिकी हैं। क्या वर्तमान शहर अध्यक्ष विवेक बोडे को पुनः जिम्मेदारी सौंपी जाएगी या फिर कोई नया चेहरा भाजपा की कमान संभालेगा? यह आने वाले दिनों में स्पष्ट हो जाएगा, लेकिन इतना तय है कि इस बार का निर्णय घुग्घुस भाजपा की दिशा और दशा तय करेगा।
राजनीति में बदलाव की बयार बह रही है — देखना यह होगा कि भाजपा किस दिशा में आगे बढ़ती है।





