घुग्घुस (चंद्रपुर) : यह मामला प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है. रेत और ईंटभट्ठा व्यापारियों के ट्रैक्टर में कोयला मिलने और अब तक कोई कार्रवाई न होने से यह साफ है कि तस्करी का यह मामला सुनियोजित तरीके से हो सकता है? WCL (वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) के क्षेत्रों में कोयला तस्करी की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन इस तरह की चुप्पी अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दे सकती है.
सूत्रों के अनुसार WCL की पैदल लोहा पुलिया के आसपास तस्करी का यह मामला है. यह क्षेत्र कोयला खदानों और परिवहन मार्गों के नजदीक है, जिससे यह अवैध गतिविधियों के लिए संवेदनशील हो सकता है. रेत और ईंटभट्ठा व्यापारियों का ट्रैक्टर तस्करी में उपयोग होना इस ओर इशारा करता है कि कोयले की तस्करी में नई रणनीतियां अपनाई जा रही हैं. न्यू ईयर के आसपास की घटना होने के बावजूद कोई सख्त कार्रवाई न होना स्थानीय प्रशासन, पुलिस और WCL की सुरक्षा प्रणाली पर सवाल खड़ा करता है. यह मामला प्रशासन, तस्करों और स्थानीय व्यापारियों के बीच मिलीभगत का परिणाम हो सकता है. WCL की सुरक्षा और परिवहन प्रणाली में गंभीर खामियां उजागर हो सकती हैं. यह घटना यह संकेत देती है कि क्षेत्र में तस्करी का बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है, जो रेत, ईंट और कोयले जैसे संसाधनों का दुरुपयोग कर रहा है.
जरूरी कदम:
ट्रैक्टर के मालिक और व्यापारी से कड़ी पूछताछ की जाए. यह पता लगाया जाए कि कोयला कहां से आया और इसे कहां ले जाया जा रहा था. WCL और स्थानीय प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई. दोषी अधिकारियों की भी जांच होनी चाहिए. WCL के क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी प्रणाली को सख्त किया जाए. तस्करी के रूट्स पर नियमित गश्त और जांच की जाए. स्थानीय लोगों को जागरूक किया जाए ताकि वे ऐसी गतिविधियों की सूचना तुरंत दे सकें.
रेत तस्करों का अब कोयला तस्करों में बदलना और कार्रवाई न होना गंभीर प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है. यदि समय पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह तस्करी को और बढ़ावा देगा. प्रशासन और WCL को मिलकर त्वरित और सख्त कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके.




