(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस, चंद्रपुर : जिले के औद्योगिक क्षेत्र घुग्घुस में एक बार फिर नगर प्रशासन की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। घुग्घुस नगर परिषद कार्यालय के ठीक सामने स्थित नालियां गंदगी से लबालब भरी हुई हैं। नालियों का पानी सड़कों पर बहने को मजबूर हो रहा है, दुर्गंध से राहगीरों का गुजरना मुश्किल हो गया है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ने लगा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह हाल उस जगह का है, जहां से पूरे शहर की सफाई व्यवस्था संचालित होती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब नगर परिषद कार्यालय के सामने ही सफाई का यह हाल है, तो शहर के अन्य वार्डों की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। क्या नगर परिषद में सफाई कर्मचारियों की कमी है? या फिर सफाई का ठेका लेने वाले ठेकेदार लापरवाही बरत रहे हैं? या फिर नगराध्यक्ष, आरोग्य सभापति, बंधकम सभापति, स्वच्छता सभापति, मुख्याधिकारी और संबंधित इंजीनियर इस ओर जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं?
नगर परिषद द्वारा समय-समय पर स्वच्छता अभियान और सफाई ड्राइव की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की जाती हैं, जिनमें साफ-सुथरी सड़कों और झाड़ू लगाते कर्मचारियों के दृश्य दिखाए जाते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। सवाल यह है कि क्या सफाई केवल कैमरों और पोस्ट तक सीमित रह गई है?
विशेषज्ञों का मानना है कि जाम नालियां केवल सौंदर्य का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि यह गंभीर स्वास्थ्य संकट को जन्म दे सकती हैं। गंदे पानी के ठहराव से डेंगू, मलेरिया और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में नगर परिषद की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
नागरिकों ने मांग की है कि संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और नियमित रूप से नालियों की सफाई सुनिश्चित की जाए। यदि नगर परिषद अपने ही कार्यालय के सामने की नालियां साफ नहीं रख सकती, तो पूरे शहर को स्वच्छ रखने के दावे कितने खोखले हैं — यह सवाल अब हर नागरिक के मन में उठ रहा है।
अब देखना यह है कि प्रशासन सोशल मीडिया की चमक-दमक से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाता है या फिर यह मुद्दा भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।




