(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस नगर परिषद के प्रभाग क्रमांक 03 में बीते दो महीनों से गंभीर जलसंकट जारी है, लेकिन जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उदासीनता ने नागरिकों की परेशानी को और बढ़ा दिया है। हालात यह हैं कि नलों से पानी की जगह सिर्फ हवा आ रही है और चिंतामी कॉलेज के आसपास के कई इलाकों में लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।
नगर परिषद चुनाव 2025 से पहले नई पाइपलाइन का काम क्षेत्र में कराया गया था। दावा किया गया था कि इससे जलापूर्ति सुधरेगी, लेकिन काम पूरा होते ही समस्या और विकराल हो गई। सवाल यह है कि जब पाइपलाइन में पानी है, तो आगे क्यों नहीं पहुंच रहा? क्या लाइन में तकनीकी खामी है, लीकेज है, या फिर काम में लापरवाही बरती गई?
गर्मियों की शुरुआत सिर पर है और ऐसे में आम नागरिकों की चिंता स्वाभाविक है। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा है। इसके बावजूद नगराध्यक्ष, मुख्याधिकारी और क्षेत्र के नगर सेवक अब तक जमीनी दौरा कर स्थिति जानने की जहमत नहीं उठा पाए हैं—यह गंभीर सवाल खड़े करता है।
क्षेत्र में चर्चा है कि नेता नगर सेवक तो बन गए हैं, लेकिन ध्यान कई ओर भटका हुआ है। क्या यह समस्या ठेकेदार के भरोसे छोड़ दी गई है? क्या दोषपूर्ण काम पर जवाबदेही तय होगी? या फिर नागरिकों को यूं ही आश्वासनों के सहारे छोड़ दिया जाएगा?
नगर परिषद से मांग है कि तत्काल क्षेत्र का निरीक्षण कर तकनीकी जांच कराई जाए, लीकेज/ब्लॉकेज की पहचान हो, दोषी ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई की जाए और नियमित जलापूर्ति बहाल की जाए। वरना, यह जलसंकट आने वाले दिनों में आंदोलन का रूप ले सकता है—और उसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की होगी।




