Wednesday, April 22, 2026

Breathe of Life Multipurpose Society UCO BANK- A/C- 09110110049020, IFSC : UCBA0000911, MICR CODE : 442028501

spot_img
spot_img

प्रदूषण बना आम आदमी के लिए अभिशाप: कब मिलेगा इस त्रासदी से मुक्ति? — प्रणयकुमार बंडी

घुग्घुस शहर आज जिस जहरीली हवा में सांस ले रहा है, वह केवल पर्यावरणीय संकट नहीं, बल्कि प्रशासनिक असंवेदनशीलता और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता का जीवंत प्रमाण बन चुकी है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, दिसंबर 2025 के केवल एक महीने में ही घुग्घुस के सरकारी चिकित्सालय में अस्थमा के 29, टी.बी. के 3, तथा श्वसन संबंधी 357 मरीजों का इलाज किया गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इन बीमारियों के पीछे लगातार बढ़ता वायु एवं ध्वनि प्रदूषण एक प्रमुख कारण है।

सवाल यह नहीं कि प्रदूषण है, सवाल यह है कि जिम्मेदार कौन?

औद्योगिक गतिविधियों, भारी वाहनों की आवाजाही और नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने वाली इकाइयों के चलते घुग्घुस धीरे-धीरे एक “गैस चैंबर” में तब्दील होता जा रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस गंभीर स्थिति के बावजूद आईएएस, आईपीएस शिक्षित अधिकारी, जिला कलेक्टर, विधायक, सांसद, घुग्घुस नगर परिषद प्रशासन, जनप्रतिनिधि और यहां तक कि नामी मीडिया प्रतिनिधि भी मूकदर्शक बने हुए हैं।

जनता कराह रही है, प्रशासन मौन है

इस प्रदूषण की सबसे बड़ी कीमत स्कूली छात्र-छात्राएं, बुजुर्ग, महिलाएं, शिशु, बीमार नागरिक और आम मेहनतकश लोग चुका रहे हैं। बच्चों की सांस फूल रही है, बुजुर्ग इनहेलर पर निर्भर हो चुके हैं, और अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।
इसके बावजूद, ज्ञापन, निवेदन और शिकायतें केवल फाइलों में दबकर रह गई हैं। न निरीक्षण होता है, न ठोस कार्रवाई—सिर्फ औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं।

क्या घुग्घुस के नागरिकों की जान की कोई कीमत नहीं?

यह सवाल अब हर जागरूक नागरिक के मन में है कि क्या घुग्घुस के लोगों का जीवन इतना सस्ता है कि उसे उद्योगों और प्रशासनिक लापरवाही के हवाले कर दिया जाए? क्या तब तक इंतजार किया जाएगा जब यह संकट किसी बड़े हादसे या मौतों में तब्दील हो जाए?

अब चुप्पी नहीं, जवाब चाहिए

यह समय घोषणाओं का नहीं, कड़े कदमों का है। प्रदूषण फैलाने वालों पर तत्काल कार्रवाई, नियमित स्वास्थ्य सर्वे, प्रदूषण नियंत्रण के सख्त उपाय और पारदर्शी जवाबदेही—यही एकमात्र रास्ता है।
यदि अब भी जिम्मेदारों ने आंखें मूंदे रखीं, तो इतिहास घुग्घुस के इस दौर को “प्रशासनिक विफलता और मानवीय त्रासदी” के रूप में याद रखेगा।

प्रश्न वही है—कब मिलेगी आम आदमी को इस प्रदूषण रूपी अभिशाप से मुक्ति?

spot_img

Pranaykumar Bandi

WhatsApp No - 9112388440
WhatsApp No - 9096362611
Email id: vartamanvarta1@gmail.com

RELATED ARTICLES
Today News

Breaking News

Crime News