Saturday, May 23, 2026

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घुग्घुस नगरपरिषद चुनाव 2025 पर गंभीर आरोप: निष्ठा बनाम गद्दारी की राजनीति उजागर

(प्रणयकुमार बंडी)

घुग्घुस, चंद्रपुर। घुग्घुस नगरपरिषद की हाल ही में संपन्न हुई सार्वत्रिक चुनाव 2025 को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। माजी उपसरपंच, ग्राम पंचायत घुग्घुस सुधाकर गणपत बांदुरकर के अनुसार, भले ही जनता ने इस चुनाव में अपना फैसला स्पष्ट रूप से दिया हो, लेकिन चुनावी प्रक्रिया के दौरान लोकतंत्र को कलंकित करने वाली कई चिंताजनक घटनाएं सामने आई हैं।

बांदुरकर का कहना है कि इस चुनाव में छुपी हुई राजनीतिक साठगाठ और गुप्त समझौतों के चलते कई ईमानदार और पार्टी-निष्ठ उम्मीदवारों को भारी अन्याय सहना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकांश विजयी उम्मीदवारों ने अपनी ही पार्टी के प्रति निष्ठावान रहने के बजाय विरोधी दलों के उम्मीदवारों के साथ गुप्त तालमेल किया। इस साठगाठ का मुख्य उद्देश्य अपनी ही पार्टी के लोकप्रिय और ईमानदार उम्मीदवारों को हराना तथा विरोधी पक्ष के कुछ चुनिंदा उम्मीदवारों को जिताना था।

उन्होंने यह भी कहा कि यह छुपी हुई राजनीतिक चालें केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की पार्टियों तक में योजनाबद्ध तरीके से लागू की गईं। मतों का जानबूझकर विभाजन, कार्यकर्ताओं को भ्रमित करना और पार्टी के भीतर के वैचारिक विरोधियों को कमजोर करने का पूरा तंत्र इस चुनाव में सक्रिय रहा।

सुधाकर बांदुरकर के अनुसार, इस साजिश का सबसे बड़ा नुकसान उन उम्मीदवारों को हुआ जो स्वाभिमानी विचारधारा के साथ ईमानदारी से कार्य कर रहे थे। कई स्थानों पर ऐसे उम्मीदवार बेहद कम मतों से पराजित हुए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पराजय जनता के विश्वास की नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर हुई गद्दारी का परिणाम है।

दूसरी ओर, पार्टी से विश्वासघात कर विरोधी दलों से साठगाठ करने वाले कुछ उम्मीदवार भले ही चुनाव जीत गए हों, लेकिन वे न तो अपनी अंतरात्मा में और न ही जनता की नजर में सच्चे विजेता हैं। सत्ता की लालसा में की गई गद्दारी एक स्थायी दाग होती है, जो समय के साथ जनता के सामने उजागर हो जाती है।

बांदुरकर ने कहा कि घुग्घुस की जनता जागरूक और समझदार है। वह सत्य और असत्य के बीच का अंतर पहचानती है। जो गद्दारी आज नजर नहीं आ रही, वह कल जनता की अदालत में अवश्य उजागर होगी। लोकतंत्र में सत्ता आती-जाती रहती है, लेकिन ईमानदारी, निष्ठा और स्वाभिमान ही सच्ची राजनीतिक पूंजी होती है।

अंत में उन्होंने कहा कि यह चुनाव केवल परिणामों की लड़ाई नहीं थी, बल्कि निष्ठा और गद्दारी के बीच का संघर्ष था। जनता को धोखा देकर साजिशों के माध्यम से हासिल की गई जीत क्षणिक होती है, जबकि सत्य हमेशा कायम रहता है।

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