आज का दिन भारतीय सैन्य इतिहास में गौरव और वीरता की एक अद्वितीय मिसाल से जुड़ा है। 17 जुलाई 1943 को पंजाब के लुधियाना जिले में जन्मे फ्लाइंग ऑफिसर निर्मल जीत सिंह सेखों भारतीय वायुसेना के पहले और एकमात्र परम वीर चक्र से सम्मानित योद्धा हैं। उनका साहस, बलिदान और राष्ट्रभक्ति आज भी हर देशवासी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
प्रारंभिक जीवन और सैन्य सेवा
निर्मल जीत सिंह सेखों का जन्म एक सैन्य परिवार में हुआ था। उनके पिता भी भारतीय सेना में कार्यरत थे। देशभक्ति की भावना उनके रग-रग में बसी थी। उन्होंने भारतीय वायुसेना को अपनी सेवा का माध्यम चुना और फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में अत्यंत कम उम्र में सेवा में शामिल हो गए।
1971 का भारत-पाक युद्ध और श्रीनगर का आसमान
3 दिसंबर 1971 को भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ गया। 14 दिसंबर 1971 को, जब पाकिस्तान वायुसेना के छह साब्रे जेट विमानों ने श्रीनगर एयरबेस पर हमला किया, तब फ्लाइंग ऑफिसर सेखों ने बिना किसी हिचकिचाहट के जवाबी कार्रवाई की।
अपने Gnat लड़ाकू विमान में उड़ान भरते हुए उन्होंने दुश्मन के विमानों से मुकाबला किया। अत्यधिक विषम परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने दो पाकिस्तानी विमानों को मार गिराया। लेकिन इस वीरतापूर्ण मुकाबले के दौरान उनका विमान क्षतिग्रस्त हो गया और वे वीरगति को प्राप्त हो गए।
परम वीर चक्र से सम्मानित
उनकी इस अद्वितीय वीरता, अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार “परम वीर चक्र” से सम्मानित किया गया। वे आज तक भारतीय वायुसेना के इकलौते परम वीर चक्र विजेता हैं।
स्मृति और प्रेरणा
फ्लाइंग ऑफिसर सेखों की स्मृति में श्रीनगर एयरबेस पर उनकी प्रतिमा स्थापित की गई है। पंजाब के कई स्थानों पर भी उनकी बहादुरी को सलाम करते हुए स्मारक बनाए गए हैं। भारतीय वायुसेना और संपूर्ण भारतवर्ष उन्हें एक वीर योद्धा के रूप में श्रद्धांजलि अर्पित करता है।
फ्लाइंग ऑफिसर निर्मल जीत सिंह सेखों का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्चा राष्ट्रप्रेम अपने प्राणों की आहुति देने से भी पीछे नहीं हटता। उनका बलिदान हर भारतीय के दिल में अमिट छाप छोड़ गया है।





