(प्रणयकुमार बंडी)
चंद्रपुर (महाराष्ट्र): चंद्रपुर जिले की राजनीति में आजकल एक सवाल लोगों की जुबान पर है – “क्या किशोर जोर्गेवार अब भी 200 यूनिट मुफ्त बिजली की बात करेंगे?”
विधायक किशोर जोर्गेवार, जो कभी बतौर अपक्ष नेता चंद्रपुर की जनता के बीच लोकप्रिय हुए थे, आज भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं और विधानसभा में लगातार दूसरी बार पहुंचे हैं। दिल्ली से लेकर गली तक उनकी बात मानी जाती है, यह चर्चा खुद उनके समर्थक करते हैं। लेकिन अब जनता पूछ रही है – “क्या यह वही जोर्गेवार हैं जो विधायक बनने से पहले और पहली बार विधायक बनने के बाद भी 200 यूनिट मुफ्त बिजली का दम भरते थे?”
अब सत्ता में हैं, क्या फिर भी चुप रहेंगे?
जब वे अपक्ष थे, तब भी 200 यूनिट मुफ्त बिजली की मांग को लेकर सक्रिय थे। जनसभा से लेकर मीडिया तक, हर जगह यही आवाज़ सुनाई देती थी। अब जबकि राज्य और केंद्र दोनों में उनकी पार्टी की सरकार है, क्या इस मुद्दे को साकार करने का यही सही समय नहीं है? या फिर अब यह मांग सिर्फ कागजों, बयानों और पुराने पोस्टरों तक सिमट कर रह जाएगी?
पुराने समर्थक, नई चुप्पी
चुनाव से पहले जो नेता, कार्यकर्ता और सामाजिक संगठन इस मुद्दे को जोर्गेवार की सबसे बड़ी खासियत बताते थे, उनमें से कई आज उनके नज़दीकी माने जाते हैं। लेकिन अब वे भी चुप हैं। न नारा, न निवेदन, न आंदोलन – यह चुप्पी सवाल पैदा कर रही है। क्या वे लोग अब विधायक की छवि खराब होने के डर से 200 यूनिट का मुद्दा नहीं उठाएंगे?
असली मुद्दे या भटकाव?
वर्तमान में चंद्रपुर जिले में घोटाले, अवैध निर्माण, फर्जी शिक्षक, “नोट फॉर सेल” जैसी चुनावी घटनाएं, 33 करोड़ वृक्षारोपण का विवाद, स्थानीय बनाम बाहरी रोजगार का मुद्दा – इन सबने जनता का ध्यान खींचा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये मुद्दे वास्तव में समाधान चाहते हैं या सिर्फ जनता और सरकार का समय बर्बाद करने का जरिया बनते जा रहे हैं? क्या 200 यूनिट जैसे सीधे और जरूरी मुद्दे इन सबके शोर में दबा दिए जाएंगे?
जनता देख रही है
चंद्रपुर की जनता अब और समझदार हो चुकी है। वह जानती है कि चुनावी वादे सिर्फ भाषणों में नहीं, जमीन पर दिखने चाहिए। अगर विधायक जोर्गेवार वाकई में जनता के नेता हैं, तो उन्हें अब ‘200 यूनिट’ के मुद्दे पर खुलकर बात करनी चाहिए – न कि गोलमोल जवाबों में पांच साल निकालने चाहिए।
चंद्रपुर की विधानसभा में अब जनता को जवाब चाहिए – सिर्फ आश्वासन नहीं। 200 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा क्या वास्तव में जनहित में था या फिर सिर्फ एक चुनावी हथियार? आने वाले महीनों में यह तय होगा कि किशोर जोर्गेवार जनता के साथ खड़े नेता हैं या सत्ता के साथ खामोश रहने वाले जनप्रतिनिधि।
अगर 200 यूनिट का मुद्दा वास्तव में जनकल्याण से जुड़ा है, तो यह कभी पुराना नहीं होता। सवाल पूछने का अधिकार जनता का है और जवाब देना चुने गए प्रतिनिधि की जिम्मेदारी।





