घुग्घुस (चंद्रपुर): चंद्रपुर जिले के घुग्घुस शहर में नगरपरिषद के कामकाज को लेकर महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा है। 19 जून दोपहर महिला कांग्रेस की ओर से नगरपरिषद के खिलाफ अनोखा आंदोलन “थोड़ी चूड़ियां पहन लो” के नारे के साथ किया गया।
महिलाओं का आरोप है कि जैसे नई नवविवाहित महिला कुछ दिनों तक घर के काम नहीं करती, वैसे ही नगरपरिषद के मुख्याधिकारी, जो 6-8 महीने पहले पदभार संभाल चुके हैं, अभी तक मूड में हैं और शहर के विकास के प्रति पूरी तरह निष्क्रिय हैं। इसी के विरोध में महिला कांग्रेस ने आंदोलन का निर्णय लिया।
इस आंदोलन का नेतृत्व कांग्रेस अध्यक्ष राजुरेड्डी के मार्गदर्शन में किया गया। 16 जून को महिला कांग्रेस की ओर से नगरपरिषद और पुलिस थाने में निवेदन सौंपा गया।
आंदोलन में उपस्थित प्रमुख महिलाएं: यास्मिन सैय्यद (महिला जिला उपाध्यक्ष), पदमा त्रिवेणी (जिल्हा महासचिव), संगीता बोबडे (महिला शहर अध्यक्ष), मंगला बुरांडे सहित बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं।
आंदोलन के प्रमुख मुद्दे:
आवारा कुत्तों का आतंक:
पिछले तीन वर्षों से निवेदन दिए जाने के बावजूद नगरपरिषद ने आवारा कुत्तों की समस्या पर कोई कार्यवाही नहीं की। कुत्तों के हमलों में एक 3 वर्षीय बच्चा और 65 वर्षीय महिला घायल हो चुकी हैं।
पानी की भारी किल्लत:
वर्धा नदी पास में होते हुए भी शहर को नियमित जल आपूर्ति नहीं हो रही। नल के समय निश्चित नहीं हैं, कभी दिन में, कभी रात में और कई बार दो-दो दिन नल नहीं आते। वॉटर टैंकरों से मनमानी की जाती है और महिलाओं से पैसे भी मांगे जाते हैं।
नालों की साफ-सफाई की अनदेखी:
शहर के कई इलाकों में नाले ही नहीं हैं और जहाँ हैं, वहाँ सफाई नहीं होती। निकाला गया कचरा वहीं पड़ा रहता है जिससे बीमारियाँ फैल रही हैं।
शास्त्री नगर में अनदेखी:
रामनगर और इंदिरा नगर में कचरा गाड़ी जाती है, लेकिन शास्त्री नगर में नहीं। वहाँ का वॉटर एटीएम भी लंबे समय से बंद है, जिससे लोगों को भारी परेशानी हो रही है।
सड़क और स्ट्रीट लाइट की समस्या:
कई वार्डों में रास्ते ही नहीं हैं। वार्ड क्रमांक 06 के साई नगर, तेगिया नगर और लुंबिनी नगर में हालात और भी खराब हैं। पथदीप बंद पड़े हैं जिससे अंधेरे में रहना पड़ता है।
मुख्याधिकारी की गैरहाजिरी और मनमानी:
कार्यालय सप्ताह में सिर्फ 5 दिन खुलता है, लेकिन मुख्याधिकारी रंजनकर अक्सर गायब रहते हैं और मनमर्जी से आते हैं। नागरिकों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
भेदभावपूर्ण कार्रवाई:
नगरपरिषद ने विपक्षी पार्टियों के होर्डिंग्स तो तुरंत हटाए, लेकिन सत्ताधारी पक्ष के बैनर्स हटाने में टालमटोल की।
महिला कांग्रेस का यह आंदोलन किसी पार्टी विशेष का नहीं बल्कि आम नागरिकों की समस्याओं को लेकर की।




