भारत के स्वतंत्रता संग्राम की नायिका और देश की राजनीति में एक प्रेरणादायक नाम रहीं सुचेता कृपलानी। उन्होंने न केवल भारत की आज़ादी की लड़ाई में हिस्सा लिया, बल्कि आज़ाद भारत में उत्तर प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव भी प्राप्त किया।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
सुचेता कृपलानी का जन्म 25 जून 1908 को अंबाला (तत्कालीन पंजाब प्रांत) में हुआ था। उनके पिता सरकारी कर्मचारी थे और शिक्षा के प्रति गंभीर थे। सुचेता ने दिल्ली और लाहौर में पढ़ाई की और बाद में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में अध्यापन कार्य भी किया।
स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
सुचेता कृपलानी ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में चलाए गए भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भाग लिया। उन्होंने महिलाओं को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ने का कार्य किया और कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की एक प्रभावशाली नेता बन गईं।
वह 1942 के आंदोलन के दौरान भूमिगत रहीं और ब्रिटिश सरकार के खिलाफ क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल रहीं। उन्होंने महिलाओं में जागरूकता फैलाने का कार्य भी किया और स्वतंत्रता सेनानियों के लिए साहसिक कार्य किए।
भारतीय संविधान सभा की सदस्य
1946 में वह संविधान सभा की सदस्य चुनी गईं। वे उन कुछ महिलाओं में थीं जिन्होंने भारत के संविधान निर्माण में भाग लिया और संविधान सभा में महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक न्याय के पक्ष में आवाज उठाई।
मुख्यमंत्री के रूप में
1963 में वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टिकट पर उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं और देश की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव प्राप्त किया। उनका कार्यकाल 1963 से 1967 तक रहा।
मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने प्रशासन में अनुशासन, महिलाओं की भागीदारी और शिक्षा के क्षेत्र में कई सुधार लागू किए। उनका नेतृत्व कठिन समय में हुआ जब राज्य में कई राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियाँ थीं।
जीवन के अंतिम वर्ष
राजनीति से रिटायरमेंट के बाद उन्होंने सामाजिक कार्यों में समय दिया और एक सादगीपूर्ण जीवन जीया। उनका निधन 1 दिसंबर 1974 को हुआ।
सुचेता कृपलानी न केवल महिलाओं के लिए एक प्रेरणा हैं, बल्कि भारत की राजनीतिक और सामाजिक चेतना की प्रतीक भी हैं। उनका जीवन दिखाता है कि कैसे एक शिक्षित, साहसी और प्रतिबद्ध महिला समाज को दिशा दे सकती है। आज उनके जन्मदिवस पर उन्हें नमन करते हुए हम उनके संघर्ष और योगदान को स्मरण करते हैं।




