भारतीय संविधान का अनुच्छेद 89 राज्यसभा (जिसे परिषद् राज्य या उच्च सदन कहा जाता है) के दो प्रमुख पदों — सभापति और उपसभापति — की व्यवस्था करता है। यह अनुच्छेद राज्यसभा की कार्यवाही को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए आवश्यक पदों की संरचना निर्धारित करता है।
अनुच्छेद 89 – राज्यसभा के सभापति और उपसभापति:
राज्यसभा का प्रत्येक सत्र आरंभ होने पर, राज्यसभा अपने सदस्यों में से एक को उपसभापति के रूप में चुनेगी और जब कभी यह पद रिक्त हो जाएगा, तो सदन किसी अन्य सदस्य को इसके लिए चुन लेगा।
उपराष्ट्रपति, भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति (Ex-officio Chairman) होता है और जब वह उपस्थित होता है, तो वह राज्यसभा की अध्यक्षता करता है।
अनुच्छेद 89 की मुख्य बातें:
सभापति (Chairman): भारत के उपराष्ट्रपति को संविधान द्वारा राज्यसभा का सभापति घोषित किया गया है। वे इस पद पर तब तक बने रहते हैं जब तक वे उपराष्ट्रपति बने रहते हैं।
उपसभापति (Deputy Chairman): राज्यसभा स्वयं अपने सदस्यों में से एक को उपसभापति के रूप में चुनती है। उपसभापति का कार्य तब विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है जब सभापति अनुपस्थित हों।
कार्य प्रणाली में भूमिका: सभापति और उपसभापति दोनों का मुख्य कार्य राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन करना, अनुशासन बनाए रखना, और प्रक्रिया संबंधी नियमों का पालन कराना है।
अनुच्छेद 89 यह सुनिश्चित करता है कि राज्यसभा में नेतृत्व का अभाव न हो और उसकी कार्यवाही बिना व्यवधान के चले। यह अनुच्छेद भारतीय लोकतंत्र में विधायी प्रक्रिया की सुचारुता और निरंतरता बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।




