नई दिल्ली : अमेरिका द्वारा ईरान की परमाणु सुविधाओं पर हवाई हमलों की शुरुआत के बाद से पश्चिम एशिया में हवाई यात्रा गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। सुरक्षा चिंताओं के कारण कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस इस क्षेत्र के हवाई क्षेत्र से परहेज़ कर रही हैं, जिससे उड़ानों में देरी, लंबा सफर और परिचालन लागत में भारी वृद्धि देखी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र का हवाई क्षेत्र वैश्विक हवाई यातायात के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। परंतु मौजूदा सैन्य तनाव और संभावित खतरे के चलते एयरलाइंस ने वैकल्पिक रास्तों को अपनाना शुरू कर दिया है। इससे यूरोप और एशिया के बीच की उड़ानों की अवधि में 1 से 3 घंटे तक का इज़ाफा देखा गया है।
विमानन क्षेत्र में बढ़ी चिंताएं
कतर एयरवेज, लुफ्थांसा, ब्रिटिश एयरवेज और सिंगापुर एयरलाइंस जैसी कंपनियों ने अपने रूटों की समीक्षा शुरू कर दी है। कई एयरलाइनों ने स्पष्ट किया है कि वे ईरान, इराक और उसके आसपास के हवाई क्षेत्र से फिलहाल उड़ानें नहीं भरेंगी।
एयर ट्रैफिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे न केवल यात्रियों को असुविधा होगी, बल्कि टिकट की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। कार्गो उड़ानों पर भी इसका असर दिख रहा है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
भारतीय उड़ानों पर असर
भारत से पश्चिम की ओर जाने वाली उड़ानों को भी अपने रूट में बदलाव करना पड़ रहा है। इससे दिल्ली, मुंबई और अन्य प्रमुख शहरों से यूरोप और अमेरिका जाने वाली उड़ानों का समय बढ़ गया है।
सरकार और विमानन नियामकों द्वारा स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) ने एयरलाइंस को सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की सलाह दी है।
क्षेत्र में सैन्य तनाव के बीच हवाई यातायात पर गंभीर असर पड़ा है। जब तक हालात सामान्य नहीं होते, यात्रियों को उड़ानों में देरी और महंगे किराए के लिए तैयार रहना होगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा जल्द समाधान की उम्मीद की जा रही है ताकि उड़ानों की सुरक्षा और नियमितता बहाल हो सके।




