हर वर्ष 29 जून को सांख्यिकी दिवस (Statistics Day) के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस भारत के महान सांख्यिकीविद् प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जयंती के उपलक्ष्य में समर्पित है। प्रो. महालनोबिस न केवल एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक थे, बल्कि भारत में सांख्यिकी के संस्थागत विकास, आर्थिक नियोजन, और सांख्यिकीय अनुसंधान के क्षेत्र में उनके योगदान को आज भी पूरे आदर के साथ याद किया जाता है।
प्रो. महालनोबिस का योगदान
प्रोफेसर महालनोबिस ने भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) की स्थापना की और राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) की अवधारणा को विकसित किया। उन्होंने ‘महालनोबिस दूरी’ नामक सांख्यिकीय विधि की खोज की, जिसका उपयोग आज भी सांख्यिकीय विश्लेषण और डेटा माइनिंग में किया जाता है। उन्होंने योजना आयोग के सदस्य के रूप में भारत के द्वितीय पंचवर्षीय योजना का ढांचा तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सांख्यिकी दिवस का उद्देश्य
इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य सांख्यिकी के महत्व को समाज के बीच प्रचारित करना और सामाजिक-आर्थिक नीतियों के निर्माण में इसके उपयोग को रेखांकित करना है। साथ ही, यह दिन युवाओं को सांख्यिकी जैसे विषयों की ओर आकर्षित करने और इस क्षेत्र में नवाचार व अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करता है।
वर्ष 2025 का विषय: “राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के 75 वर्ष”
इस वर्ष सांख्यिकी दिवस का विषय है – “राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के 75 वर्ष”। यह विषय भारतीय सांख्यिकी प्रणाली में एक ऐतिहासिक उपलब्धि को दर्शाता है। NSS की शुरुआत 1950 में हुई थी, जिसका उद्देश्य देशभर में समृद्ध, सटीक और विश्वसनीय आंकड़ों को एकत्रित करना था, जिससे सरकार को विभिन्न क्षेत्रों में नीतिगत निर्णय लेने में सहायता मिल सके।
राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण की भूमिका
पिछले 75 वर्षों में NSS ने शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी, उपभोग व्यय, कृषि, श्रम, ग्रामीण-शहरी जीवन आदि विषयों पर महत्वपूर्ण आँकड़े एकत्र किए हैं। यह आँकड़े नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और योजनाकारों के लिए अत्यंत उपयोगी रहे हैं। NSS की रिपोर्टें भारतीय समाज के बदलते स्वरूप और समस्याओं की गहराई को समझने में सहायक रही हैं।
सांख्यिकी दिवस न केवल प्रोफेसर महालनोबिस को श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर है, बल्कि यह सांख्यिकी की सामाजिक उपयोगिता और डेटा आधारित निर्णयों के महत्व को रेखांकित करने का दिन भी है। जब देश आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी रूप से प्रगति कर रहा है, ऐसे समय में सांख्यिकी जैसे विषयों की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है।
आइए, इस सांख्यिकी दिवस पर हम सभी मिलकर प्रो. महालनोबिस के योगदान को याद करें और समाज की बेहतरी के लिए सांख्यिकी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करें।




