नागरपुर का नंगा पुतला चौक शहर के उन रहस्यमयी स्थलों में से एक है, जहाँ से जुड़ी कहानियाँ और लोककथाएँ आज भी युवा-बुजुर्ग हर किसी को आकर्षित करती हैं। इसे औपचारिक रूप से वल्लभाचार्य चौक कहा जाता है, लेकिन शहरवासी “नंगा पुतला चौक” नाम से ही जानते और पुकारते हैं।
नाम की उत्पत्ति
1971 में धारस्कर रोड परिसर में जयकुमार जैन के परिवार में एक बच्चे का जन्म हुआ, जो डागा अस्पताल से लौटते समय 9 नवंबर को होलसेल क्लॉथ मार्केट के पास एक सिटी बस की चपेट में आने से घायल हो गया और उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना की याद में पार्षद वल्लभदास डागा ने क्षेत्रवासियों एवं मनपा की मदद से 20 दिसंबर 1980 को इस चौराहे का निर्माण करवाया, जिसका मूल नाम “ब्रह्म माया संयोग” रखा गया था। बाद में इसका नाम बदलकर वल्लभाचार्य चौक हुआ, लेकिन चौक पर स्थापित निर्वस्त्र बालक की मूर्ति के कारण आमजन ने इसे “नंगा पुतला चौक” कहना शुरू कर दिया।
चौक एवं मूर्ति का विवरण
चौक के केंद्र में एक स्मारक-मूर्ति है, जो कमल के फूल के आकार के बेस पर रखी है। मूर्ति में एक हाथ महिला का और एक हाथ पुरुष का दर्शाया गया है, दोनों हाथों के बीच मुस्कराता निर्वस्त्र बालक अपना हाथ ऊपर उठाए सबको अलविदा कर रहा है। बालक के पैरों के पास एक छोटा ब्रह्मकमल है, जिसमें फव्वारा भी लगा हुआ था। एक समय इस फव्वारे की रंगीन बौछारों और चौक के सुन्दर रख-रखाव ने लोगों को खूब लुभाया था।
रख-रखाव और लोकश्रुति
समय के साथ यह स्मारक जीर्ण हो गया। फरवरी 2019 में स्थानीय पार्षद निधि से चौक की मरम्मत और रंगरोगन किया गया, जिसमें इसे फिर से चमकदार बनाया गया और कमल के पत्तों तथा फव्वारे को भी नया रूप दिया गया। एक दिलचस्प लोककथा यह भी है कि कई बार लोगों ने मूर्ति को चड्डी पहनाई, ताकि “नंगा” होने की धारणा कम हो जाए—इससे चौक की लोकप्रियता और भी बढ़ गई।
वर्तमान अवस्था और भविष्य
आज भी जब कोई नागपुर घूमने आता है, तो नंगा पुतला चौक पर रुकना नहीं भूलता। स्थानीय व्यापारी यहाँ के हलके फुल्के स्मरणों और फोटोशूट के लिए इसे पीछे छोड़ते नहीं हैं। यदि आप भी नागपुर आएँ तो इस चौक की अनोखी मूर्ति और उसकी कहानी जरूर देखें, और कमेंट में बताएं—क्या आपको पहले से यह कहानी पता थी?
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