नई दिल्ली — भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के रूप में रिकॉर्ड 81 अरब डॉलर आकर्षित किए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 14% अधिक है। यह आंकड़ा देश की आर्थिक स्थिरता और वैश्विक निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
एफडीआई के इस प्रवाह में सेवा क्षेत्र सबसे बड़ा लाभार्थी रहा, जिसमें कुल निवेश का 19% हिस्सा आया। इसके बाद कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर क्षेत्र को 16%, जबकि ट्रेडिंग क्षेत्र को 8% निवेश प्राप्त हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में कारोबार के अनुकूल माहौल, डिजिटल अवसंरचना में सुधार और नीतिगत पारदर्शिता ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया है।
सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में एफडीआई को और बढ़ाना है, जिसके लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएं (PLI), ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है।




