घुग्घुस (चंद्रपुर): जिला परिषद सेमी इंग्लिश स्कूल, नकोडा (तेलुगु), जो 2020-2021 में सेमी इंग्लिश माध्यम के रूप में स्थापित हुआ, ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नई क्रांति लाई है. इस स्कूल का उद्देश्य न केवल तेलुगु भाषीय बल्कि अन्य भाषीय बच्चों को भी अंग्रेजी माध्यम में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है. यह पहल क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बनी हुई है और इसे हर ओर से सराहना मिल रही है.
पूर्व छात्रों का विशेष दौरा और गणतंत्र दिवस की तैयारियां
शनिवार, 25 जनवरी 2025 को विद्यालय में पूर्व छात्रों का विशेष दौरा आयोजित किया गया. इस अवसर पर गणतंत्र दिवस की तैयारियों को देखकर छात्रों ने अपने स्कूल के साथ जुड़ी पुरानी यादों को ताजा किया. विद्यालय की आधुनिक सुविधाओं और उपलब्धियों को देखकर पूर्व छात्रों ने प्रसन्नता व्यक्त की. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब यह स्कूल सभी नागरिकों के लिए खुला है और यहां शिक्षा पूरी तरह निशुल्क प्रदान की जा रही है. साथ ही, स्मार्ट क्लासेस जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं.
पूर्व छात्रों की सराहना और सुझाव
पूर्व छात्रों ने विद्यालय की प्रगति की सराहना करते हुए सरकार से अपील की कि सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए और प्रयास किए जाएं. उन्होंने सुझाव दिया कि दिल्ली सरकार के मॉडल की तर्ज पर इस तरह के स्कूलों को और विकसित किया जाना चाहिए. इससे गरीब और वंचित परिवारों के बच्चों को भी बेहतर शिक्षा प्राप्त करने के अवसर मिल सकेंगे.
विद्यालय का ऐतिहासिक महत्व
विद्यालय की मुख्याध्यापिका ज्योति तांड्रा ने इस स्कूल के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यहां से पढ़े हुए कई छात्र-छात्राएं आज इंजीनियरिंग, चिकित्सा, शिक्षा, व्यापार और अन्य उच्चस्तरीय क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुके हैं. कुछ छात्र-छात्राएं विदेशों में भी उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं. विद्यालय ने क्षेत्र के शिक्षा स्तर को ऊंचा उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
विशेष दौरे में उपस्थित पूर्व छात्र
इस अवसर पर सलीम शेख, रवि चिट्ठाला, सीनू गोसकुल्ला, प्रभाकर कुम्मरी, विजय कोंड्रा, राकेश चिंतला, प्रणयकुमार बंडी सहित अन्य पूर्व छात्र उपस्थित रहे. उनकी उपस्थिति और विचारों ने इस दौरे को विशेष और प्रेरणादायक बना दिया.
जिला परिषद सेमी इंग्लिश स्कूल, नकोडा (तेलुगु) ने शिक्षा के क्षेत्र में जो नया अध्याय शुरू किया है, वह न केवल वर्तमान पीढ़ी बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है. विद्यालय की प्रगति और उन्नति के लिए समाज और सरकार का सहयोग अत्यंत आवश्यक है.




