कोलकाता : फुटबाल के महान कोच सैयद अब्दुल रहीम की भूमिका में अजय देवगन की इस फिल्म ‘मैदान’ का लोगों को बेसब्री से इंतजार है. सैयद अब्दुल रहीम की यह कहानी फुटबाल को ऊंचाइयों तक ले जाने में संघर्ष की कहानी है. फुटबाल के इस महान खिलाड़ी की वजह से ही भारत फुटबाल में एक मुकाम पर है.
फिल्म के निर्माता हैं बोनी कपूर, अरुणाभ जॉय सेन गुप्ता तथा निर्देशक हैं अमित शर्मा. ये सभी आज के कार्यक्रम में उपस्थित थे. साथ ही उपस्थित हुए थे बंगला फिल्म के नायक रुद्रनील. सभी जानते हैं कि भारत में फुटबाल का अगर कहीं दिल बसता है तो वह है कोलकाता. यहां की हर दीवारों से सैयद रहीम के नाम की आवाज गूंजती है. उनकी इस क्रांतिकारी कहानी को देखकर हर फुटबाल प्रेमी का चेहरा खुशी से चमक उठेगा.
सैयद रहीम की फुटबाल यात्रा शुरू तो हुई हैदराबाद में मगर बुलंदियों तक पहुंची कोलकाता पहुंचकर, जहां की जीवंत सड़कों और ऐतिहासिक फुटबाल मैदानों में इस आशय की ऊर्जा निहित थी. यहीं आकर उन्होंने पीके बनर्जी, चुन्नी गोस्वामी, प्रद्युत बर्मन, अरुण घोष और जरनैल सिंह जैसी प्रतिभाओं की खोज की, जिन्होंने भारत की फुटबाल क्रांति की नींव रखी.
‘मैदान’ फिल्म की यह टीम कोलकाता पहुंचकर न केवल रहीम बाबू की विरासत को बल्कि उस शहर को भी सलाम करती है जिसने भारतीय फुटबाल के इतिहास को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
निर्माताओं ने यहां अरुण घोष, डी.एम.के. अफजल के लिये विशेष स्क्रीनिंग का भी आयोजन किया साथ ही चुन्नी गोस्वामी, प्रद्युत बर्मन, पी.के. बनर्जी, यूसुफ खान, डी. एथिराज और अरुमैनायगम के परिवार के सदस्यों को भी आमंत्रित किया था ताकि उन्हें फिल्म रिलीज होने से पहले उनका भी आशीर्वाद मिल सके.
अमित शर्मा द्वारा निर्देशित, इस फिल्म में प्रियामणि, गजराज राव और रुद्रनील घोष भी हैं.
आपको बता दें फिल्म के निर्माताओं में ज़ी स्टूडियोज़ भी शामिल है. फिल्म में पटकथा और संवाद लिखे हैं साईविन कुआद्रस और रितेश साह. संगीतकार हैं ए.आर रहमान, फिल्म में गाने भी हैं और उन गानों गीतकार हैं मनोज मुंतशिर शुक्ला, यह फिल्म इस बार ईद के अवसर पर दुनिया भर के सिनेमाघरों में 10 अप्रैल को आईमैक्स पर भी रिलीज होने के लिए तैयार है. तो दर्शकों, देर किस बात की! हो जाइए तैयार एक अविस्मरणीय व्यक्तित्व की जिंदगी के सफर को तीन घंटे में पूरा करने के लिये.
आपको बता दें सैयद अब्दुल रहीम, भारतीय फुटबॉल के महान कोच और भारत राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के प्रबंधक थे. उन्हें आधुनिक भारतीय फुटबॉल का आर्किटेक्ट भी कहा जाता है. उन्होंने भारतीय फुटबॉल को ऊंचाई पर ले जाने की भूख इस कदर थी कि 1962 में जब जकार्ता के एशियाई खेल हो रहे थे, तब रहीम कैंसर से जूझ रहे थे, लेकिन उस समय भी उनकी आंखों में केवल गोल्ड ही बसा था. उनका यह ख्वाब पूरा भी हुआ, लेकिन अगले ही साल 1963 में कैंसर से जूझते हुए भारत के इस महान फुटबॉल कोच ने दुनिया को अलविदा कह दिया. वह भारतीय फुटबॉल को दो एशियाई गोल्ड मेडल जीतने का गर्व दिलाने वाले शख्स थे. उन्होंने एशियाई खेलों में दो गोल्ड जीतने के साथ-साथ ओलंपिक के अंतिम चार में पहुंचकर इतिहास रच दिया था. उनकी अगुवाई में भारतीय फुटबॉल टीम ने दिल्ली में हुए 1951 के एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीता था. उनका योगदान भारतीय फुटबॉल के विकास में अत्यधिक महत्वपूर्ण रहा है.




