प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस/चंद्रपुर | घुग्घुस के वार्ड क्रमांक 6, साई नगर के निवासियों ने अपनी सार्वजनिक खुली भूमि के संरक्षण और जनहित में उसके उपयोग को लेकर नगर परिषद प्रशासन के समक्ष लिखित निवेदन प्रस्तुत किया है। निवेदन में Survey No. 103 स्थित सार्वजनिक खुली भूमि पर किसी भी प्रकार के धार्मिक निर्माण को अनुमति नहीं देने तथा इस जमीन को नागरिकों के स्वास्थ्य और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए विकसित करने की मांग की गई है।
निवासियों के अनुसार, Survey No. 103 में स्थित यह भूमि क्षेत्र के नागरिकों के सामूहिक उपयोग के लिए महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थान है। निवेदन में कहा गया है कि इस जमीन पर धार्मिक संरचना के निर्माण के लिए आवेदन प्रस्तुत किए जाने की जानकारी मिली है। हालांकि, आवेदन की वास्तविक स्थिति, प्रस्तावित निर्माण तथा उससे संबंधित दस्तावेजों की पूरी जानकारी निवासियों को उपलब्ध नहीं होने की बात भी निवेदन में कही गई है।

सार्वजनिक जमीन किसी एक समूह की नहीं—सभी नागरिकों की संपत्ति
निवासियों ने अपने निवेदन में सार्वजनिक भूमि के सर्व-साझा उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि क्षेत्र में विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग आपसी सद्भाव से रहते हैं। प्रत्येक नागरिक को अपनी निजी जमीन पर कानून के अनुसार धार्मिक स्थल बनाने का अधिकार हो सकता है, लेकिन सार्वजनिक खुली जमीन का उपयोग पूरे समाज के सामूहिक हित को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
इसी आधार पर नागरिकों ने नगर परिषद से मांग की है कि Survey No. 103 पर किसी भी धार्मिक निर्माण की अनुमति देने से पहले भूमि की वास्तविक प्रकृति, कानूनी स्थिति, संबंधित दस्तावेज और लागू नियमों की निष्पक्ष जांच की जाए।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और कानूनी प्रावधानों का पालन करने की मांग
निवेदन में सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक संरचनाओं से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों तथा लागू कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की गई है। नागरिकों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रस्ताव पर निर्णय लेते समय सार्वजनिक भूमि की स्थिति और नागरिकों के सामूहिक हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
निवेदन में महाराष्ट्र नगर परिषद अधिनियम, महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत व औद्योगिक नगरी अधिनियम, 1965 सहित संबंधित कानूनी प्रावधानों का उल्लेख करते हुए सार्वजनिक खुली जगहों के संरक्षण और उनके जनहितकारी उपयोग की मांग की गई है।
धार्मिक विवाद नहीं, जनहित का सवाल
निवासियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी धर्म या धार्मिक आस्था का विरोध करना नहीं है। मुद्दा सार्वजनिक भूमि के उपयोग और उसके भविष्य से जुड़ा है। नागरिकों की मांग है कि यदि जमीन वास्तव में सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित/उपलब्ध है, तो उसका विकास ऐसा हो जिससे बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी लाभान्वित हो सकें।
इसके लिए निवेदन में तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं—
बच्चों के खेलने और बुजुर्गों के टहलने के लिए सार्वजनिक गार्डन/वॉकिंग ट्रैक विकसित किया जाए। युवाओं के शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ओपन जिम/सार्वजनिक व्यायामशाला बनाई जाए। सार्वजनिक खुली भूमि को संरक्षित कर उसे जनहित की स्थायी सुविधा के रूप में विकसित किया जाए।
नगर परिषद के फैसले पर टिकी नागरिकों की नजर
निवेदन के अंत में नागरिकों ने मांग की है कि Survey No. 103 की सार्वजनिक खुली भूमि पर किसी भी प्रकार के धार्मिक निर्माण के लिए NOC या Sanction जारी न किया जाए। यदि किसी धार्मिक अथवा अन्य संरचना के निर्माण का आवेदन प्राप्त हुआ है, तो उसकी नियमानुसार जांच कर भूमि की वास्तविक प्रकृति और कानूनी स्थिति के आधार पर निर्णय लिया जाए।
यह मामला अब केवल एक जमीन के उपयोग का प्रश्न नहीं रह गया है, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति पर नागरिकों के अधिकार, पारदर्शी प्रशासन और जनहित में निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़ा सवाल बन गया है। नगर परिषद प्रशासन इस मामले में क्या निर्णय लेता है और Survey No. 103 को भविष्य में किस उपयोग के लिए रखा जाता है, इस पर स्थानीय नागरिकों की नजर बनी हुई है।
जनता का मूल सवाल साफ है—सार्वजनिक जमीन का इस्तेमाल किसी सीमित उद्देश्य के लिए हो या ऐसी सुविधा के रूप में विकसित हो, जिसका लाभ पूरे क्षेत्र के नागरिकों को मिले? फैसला कानून, दस्तावेज और सार्वजनिक हित के आधार पर होना चाहिए।




