प्रणयकुमार बंडी
घुग्घूस, चंद्रपुर | स्वच्छता अभियान और कचरा मुक्त भारत के बड़े-बड़े दावों के बीच घुग्घूस शहर की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। शहर में दुर्गंधयुक्त कचरे का परिवहन खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए किया जा रहा है। कचरा ढोने वाले वाहनों को ढककर ले जाने का नियम मानो सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया है।
चंद्रपुर-वणी मार्ग पर छत्रपति शिवाजी महाराज चौक से लेकर घुग्घूस पुलिस स्टेशन के सामने होते हुए नकोड़ा मार्ग स्थित सीमेंट कंपनी तक जाने वाले रास्ते पर कचरे से भरे खुले वाहन रोजाना दौड़ते नजर आते हैं। इन वाहनों से सड़क पर जगह-जगह कचरा गिरता है और पूरे मार्ग पर बदबू फैलती रहती है। इससे राहगीरों, वाहन चालकों और आसपास के नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब यह मार्ग शहर के प्रमुख रास्तों में शामिल है, तब भी RTO, ट्रैफिक पुलिस, MPCB और नगर परिषद प्रशासन की नजर इन नियमों के खुले उल्लंघन पर क्यों नहीं पड़ रही? क्या संबंधित विभागों की जिम्मेदारी सिर्फ कागजी कार्रवाई तक ही सीमित है?
विडंबना यह है कि एक ओर सरकार “स्वच्छ भारत” और “कचरा मुक्त भारत” जैसे अभियानों का प्रचार कर रही है, वहीं दूसरी ओर खुले वाहनों में कचरा ढोकर शहर की सड़कों को गंदगी और दुर्गंध से भर दिया जा रहा है। यदि यही व्यवस्था है, तो स्वच्छता अभियान के दावे सवालों के घेरे में आना स्वाभाविक है।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि कचरा परिवहन करने वाले सभी वाहनों को नियमों के अनुसार पूरी तरह ढककर चलाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। जब तक जिम्मेदार विभाग अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे, तब तक शहर को दुर्गंध और गंदगी से राहत मिलना मुश्किल दिखाई देता है।




