प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर : बुधवार, दिनांक 13 मई 2026 की रात लगभग 8 बजे राजीव रतन चौक पुलिया पर लगा दिशा सूचक फलक (वणी-तड़ाली मार्ग) अचानक तेज हवा और बिन मौसम बारिश के दौरान गिर पड़ा। महज पांच मिनट चले तेज तूफान ने पुलिया निर्माण कार्य की गुणवत्ता और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली की पोल खोलकर रख दी। गनीमत रही कि उस समय कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, अन्यथा राहगीरों और पुलिया के नीचे खड़े नागरिकों की जान जा सकती थी।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पिछले पांच वर्षों से निर्माणाधीन यह पुलिया लगातार विवादों और लापरवाही का केंद्र बनी हुई है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण कार्य की मजबूती पर अब गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि एक सामान्य तूफान में भारी दिशा सूचक फलक धराशायी हो सकता है, तो भविष्य में पुलिया की सुरक्षा को लेकर कैसे भरोसा किया जाए?
घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल देखने को मिला। नागरिकों ने संबंधित निर्माण विभाग, ठेकेदार और निगरानी एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजों में निरीक्षण कर जनता की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पूरे पुलिया निर्माण कार्य का तकनीकी ऑडिट कराया जाए और दिशा सूचक फलक गिरने की घटना की निष्पक्ष जांच हो। साथ ही दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई कर जनता के सामने रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच नहीं की गई, तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना होने से इंकार नहीं किया जा सकता। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा — विभाग, ठेकेदार या प्रशासन?




