प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर : तमिलनाडु सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पूजा स्थलों, शिक्षण संस्थानों और बस स्टेशनों के 500 मीटर के दायरे में संचालित 717 सरकारी TASMAC शराब दुकानों को दो सप्ताह के भीतर बंद करने का आदेश दिया है। यह निर्णय सामाजिक और सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या महाराष्ट्र सरकार भी इसी प्रकार का साहसिक कदम उठाएगी? विशेष रूप से चंद्रपुर जिले के घुग्घुस नगर परिषद और घुग्घुस पुलिस स्टेशन क्षेत्र में चल रही शराब दुकानों पर क्या कभी नियमों के अनुसार कार्रवाई होगी?
घुग्घुस क्षेत्र में वर्षों से यह आरोप लगते रहे हैं कि कई शराब दुकानें नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रही हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्कूलों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक क्षेत्रों के आसपास भी शराब बिक्री खुलेआम जारी है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं देती। इससे लोगों में यह धारणा मजबूत हो रही है कि शराब कारोबारियों को अप्रत्यक्ष संरक्षण प्राप्त है या फिर संबंधित विभाग जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है।
सबसे गंभीर मुद्दा शिकायत व्यवस्था को लेकर सामने आ रहा है। यदि किसी नागरिक को शराब दुकान के खिलाफ शिकायत करनी हो, तो उसे घुग्घुस से लगभग 45 किलोमीटर दूर वरोरा में स्थित एक्साइज विभाग के कार्यालय तक जाना पड़ता है। डिजिटल इंडिया और ऑनलाइन प्रशासन के दौर में यह व्यवस्था खुद कई सवाल खड़े कर रही है। आम नागरिकों का कहना है कि ईमेल, ऑनलाइन आवेदन और WhatsApp के माध्यम से शिकायतें भेजने के बावजूद उन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होती। शिकायतें या तो लंबित पड़ी रहती हैं या फिर उनका कोई जवाब तक नहीं मिलता।
यही वह कमजोरी है, जिसका कथित रूप से कुछ शराब दुकान संचालक फायदा उठा रहे हैं। जब शिकायत तंत्र ही निष्क्रिय दिखाई दे, तो नियमों का पालन करवाने की उम्मीद भी कमजोर पड़ जाती है। केंद्र सरकार लगातार “डिजिटल इंडिया” का नारा देती रही है, प्रधानमंत्री Narendra Modi देश को डिजिटल और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में ले जाने की बात करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कई विभागों की कार्यप्रणाली आज भी पुराने ढर्रे पर चलती दिखाई देती है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जिलाधिकारी कार्यालय, एक्साइज विभाग, नगर परिषद और पुलिस प्रशासन के पास ऑनलाइन प्राप्त होने वाले निवेदन, अर्ज और शिकायतों पर वास्तव में कितना एक्शन लिया जाता है? यदि कार्रवाई होती है, तो उसका रिकॉर्ड और परिणाम आम जनता के सामने क्यों नहीं आते? वर्षों से लंबित पड़ी शिकायतें और अपूर्ण निराकरण व्यवस्था यह संकेत दे रही है कि आम नागरिकों को न्याय और त्वरित प्रशासनिक सेवा देने के दावे अभी अधूरे हैं।
घुग्घुस क्षेत्र के नागरिक अब यह अपेक्षा कर रहे हैं कि शासन और प्रशासन केवल घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि शराब दुकानों के नियमों की वास्तविक जांच करे, शिकायत प्रणाली को स्थानीय स्तर पर सुलभ बनाए और ऑनलाइन शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करे। अब देखना यह होगा कि महाराष्ट्र सरकार और स्थानीय प्रशासन तमिलनाडु की तर्ज पर कोई ठोस कदम उठाते हैं या फिर यह मुद्दा भी फाइलों और लंबित शिकायतों के ढेर में दबकर रह जाएगा।




