प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस (चंद्रपुर) : नगर परिषद क्षेत्र में खुले स्थानों पर भरण कार्य के लिए फ्लाई ऐश (डस्ट) के उपयोग को लेकर अब राजनीति गरमा गई है। (तौफिक सुभान अहमद शेख (स्वीकृत नगरसेवक, नगर परिषद कार्यालय घुग्घुस.) द्वारा मुख्याधिकारी को सौंपे गए लिखित निवेदन के बाद यह मुद्दा जनहित और पर्यावरण सुरक्षा के केंद्र में आ गया है।
निवेदन में आरोप लगाया गया है कि शहर के विभिन्न ओपन स्पेस में बिना किसी सुरक्षा उपाय के बड़े पैमाने पर फ्लाई ऐश का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे हवा में खतरनाक धूल कण (PM2.5 और PM10) फैल रहे हैं, जो सीधे तौर पर नागरिकों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में सांस संबंधी बीमारियां, एलर्जी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।
मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विपक्षी दलों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे “लापरवाही और नियमों की अनदेखी” करार दिया है। उनका कहना है कि यदि पर्यावरणीय नियमों का पालन किया जाता, तो इस तरह की स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लाई ऐश का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा कड़े दिशा-निर्देश तय किए गए हैं—जैसे पानी का नियमित छिड़काव, सामग्री को ढककर रखना और सीमित मात्रा में उपयोग। लेकिन घुग्घुस में इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
निवेदन में यह भी चेतावनी दी गई है कि बारिश के मौसम में यही फ्लाई ऐश नालों और जल स्रोतों में मिलकर जल प्रदूषण का कारण बन सकती है, जिससे पर्यावरण और जलजीवों को गंभीर नुकसान होगा।
जनता के बीच बढ़ते आक्रोश को देखते हुए प्रशासन पर दबाव भी बढ़ता जा रहा है। नागरिकों ने मांग की है कि जहां-जहां फ्लाई ऐश का उपयोग हो रहा है, वहां तत्काल काम रोका जाए और संबंधित ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि नगर परिषद इस गंभीर मुद्दे पर कितनी तत्परता दिखाती है या फिर यह मामला भी कागजों तक ही सीमित रह जाएगा। फिलहाल, घुग्घुस में फ्लाई ऐश का मुद्दा जनस्वास्थ्य बनाम प्रशासनिक लापरवाही की बहस का बड़ा केंद्र बन चुका है।




