प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर : नगर परिषद द्वारा जारी “घनकचरा व्यवस्थापन” संबंधी सार्वजनिक सूचना में स्पष्ट रूप से नियमों के उल्लंघन पर स्पॉट फाइन (तत्काल जुर्माना) का प्रावधान किया गया है। सड़क पर कचरा फेंकने से लेकर सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने, थूकने और खुले में शौच/मूत्र त्याग तक—हर उल्लंघन के लिए 100 रुपये से लेकर 500 रुपये तक के दंड तय किए गए हैं।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन नियमों के आधार पर वास्तव में कोई कार्रवाई हो रही है?
यदि हो रही है, तो अब तक कितना जुर्माना वसूला गया है? नगर परिषद की ओर से इस पर कोई सार्वजनिक आंकड़ा सामने नहीं आया है, जिससे पूरी प्रक्रिया पर संदेह गहराता जा रहा है।
ज़मीन पर हकीकत: नियमों की खुलेआम धज्जियां, नगर परिषद कार्यालय के सामने ही हालात बद से बदतर बने हुए हैं। मास-मछली बाजार क्षेत्र में कचरे के ढेर, तालाब के आसपास गंदगी और सड़ांध, बस स्टॉप के पास थूक, प्लास्टिक और सड़ा हुआ कचरा. ये दृश्य साफ दिखाते हैं कि नियम सिर्फ नोटिस बोर्ड तक सीमित हैं, उनका पालन कराने की इच्छाशक्ति नदारद है।
प्रशासन की चुप्पी क्यों?
जब नियमों में साफ लिखा है कि उल्लंघन पर तुरंत जुर्माना लगाया जाएगा, तो फिर: जिम्मेदार अधिकारियों की कार्रवाई कहाँ है? कितने लोगों पर जुर्माना लगाया गया? क्या कोई नियमित निरीक्षण अभियान चल रहा है?
इन सवालों पर प्रशासन की चुप्पी लोगों के आक्रोश को और बढ़ा रही है।
नागरिकों में नाराज़गी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि “जब नगर परिषद कार्यालय के सामने ही नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं, तो बाकी शहर का हाल क्या होगा?” लोगों का आरोप है कि प्रशासन केवल कागजी खानापूर्ति कर रहा है, जबकि शहर में स्वच्छता की स्थिति लगातार बिगड़ रही है।
जिम्मेदारी तय करने की मांग अब नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग तेज कर दी है कि: वास्तविक स्तर पर सख्त कार्रवाई हो, वसूले गए जुर्माने का सार्वजनिक विवरण जारी किया जाए. नियमित जांच अभियान चलाया जाए. दोषी अधिकारियों पर भी जवाबदेही तय की जाए.
घुग्घुस में स्वच्छता नियमों की स्थिति “घोषणा बनाम वास्तविकता” का जीता-जागता उदाहरण बन गई है। जब तक नियमों को सख्ती से लागू नहीं किया जाएगा और पारदर्शिता नहीं लाई जाएगी, तब तक यह अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा—और शहर गंदगी में डूबता रहेगा।




