चंद्रपुर जिले में पिछले कुछ वर्षों में औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आई है। विभिन्न क्षेत्रों में छोटे-बड़े उद्योगों का आगमन हो रहा है। कई कंपनियां अपने विस्तार की प्रक्रिया में हैं, तो कुछ टेंडर आधार पर भूमि प्राप्त कर रही हैं। इस प्रक्रिया में सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं – जिले के किसान।
बिचौलियों की बढ़ती भूमिका
जमीन अधिग्रहण के इस दौर में बिचौलियों की सक्रियता तेजी से बढ़ी है। ये लोग किसानों से उनकी ज़मीन औने-पौने दामों पर खरीदकर उद्योगपतियों को ऊंचे दामों में बेच रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है, जिससे किसान आर्थिक और कानूनी रूप से नुकसान झेल रहे हैं।
चेक बाउंस: धोखाधड़ी का नया रूप
बिचौलियों द्वारा किसानों को भुगतान के लिए दिए गए चेक समय पर क्लियर नहीं हो रहे हैं। कई किसानों के चेक बाउंस हो चुके हैं, जिससे वे आर्थिक संकट में हैं। दुर्भाग्यवश, कई किसान कानूनी जानकारी के अभाव में कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।
कमजोर तबके को बनाया जा रहा निशाना
खासतौर पर सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर किसान इस धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं। कुछ मामलों में तो किसानों को झांसे में लेकर ज़मीन के एवज में उन्हें काम देने का वादा किया जाता है, लेकिन बाद में उन्हें न काम मिलता है, न जमीन की उचित कीमत।
रुपए की लालच और मजबूरी का फायदा
कुछ किसान रुपए की तात्कालिक आवश्यकता या लालच में ज़मीन बेचने जैसे फैसले कर रहे हैं। वहीं कुछ किसानों को सीट बेचने जैसे कार्यों में धकेला जा रहा है, जिससे कंपनियों में कामगारों की संख्या तो बढ़ रही है, पर मूलभूत अधिकारों का हनन हो रहा है।
प्रशासन और विभागों की ज़िम्मेदारी
यह स्थिति केवल किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि जिला प्रशासन के लिए भी चिंता का विषय है। ज़रूरत है कि जिला कलेक्टर, आयकर विभाग और भूमि अभिलेख विभाग इस ओर गंभीरता से ध्यान दें। बिचौलियों के गोरखधंधे पर लगाम लगाने और पीड़ित किसानों को न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
चेक बाउंस जैसे मामले सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत और विश्वास पर चोट हैं। यह वक्त है कि शासन-प्रशासन सजग होकर ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगाए और किसानों को उनका वाजिब हक दिलाए।




