चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र के घुग्घुस में कई महत्वपूर्ण सरकारी योजनाएं पिछले 3 से 15 वर्षों से अधूरी पड़ी हैं। इनमें बायपास मार्ग, रेलवे ब्रिज, सरकारी अस्पताल, रोड ड्रेनेज, स्ट्रीट लाइट्स, पार्किंग, प्लांटेशन, ट्रैफिक नियंत्रण, फुटपाथ जैसे ज़रूरी काम शामिल हैं। इन सभी परियोजनाओं की दुर्दशा दर्शाती है कि क्षेत्र की बुनियादी ज़रूरतों की ओर जनप्रतिनिधि और प्रशासन पूरी तरह उदासीन हैं।
बायपास रोड का मामला विशेष रूप से गंभीर है। सामाजिक कार्यकर्ता के प्रयासों से काम शुरू जरूर हुआ, लेकिन ज़मीन देने वाले किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। किसान सुधाकर बांदुरकर की टिप्पणी ने इस मुद्दे की सच्चाई सामने रख दी – यदि किसानों ने बिना मुआवजा दिए ज़मीन न दी होती, तो यह काम शुरू ही नहीं होता। अब भी यदि उनका हक नहीं दिया गया, तो किसान काम रोक सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह प्रोजेक्ट 2012 में शुरू हुआ था और अब 2025 में भी अधूरा है। किसानों का दावा है कि उन्होंने बार-बार अधिकारियों को निवेदन दिए, लेकिन न तो किसी ने संज्ञान लिया, न ही समाधान किया। विभागीय लापरवाही का आलम यह है कि PWD के 3-4 इंजीनियर बदल चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
विश्लेषण:
यह स्थिति केवल योजनाओं की देरी का मामला नहीं है, बल्कि यह शासन की जवाबदेही और प्रशासनिक तंत्र की निष्क्रियता का प्रतीक है। किसानों को मुआवजा देना सिर्फ कानूनी जिम्मेदारी नहीं, नैतिक कर्तव्य भी है। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो विकास कार्य रुकने के साथ-साथ सामाजिक असंतोष और अव्यवस्था का खतरा भी बढ़ सकता है।
सरकार, प्रशासन और संबंधित विभागों को इस मुद्दे को प्राथमिकता देकर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि विकास के नाम पर किसानों के साथ अन्याय न हो और क्षेत्र की ज़रूरतें पूरी हो सकें।




