NA और नगर रचना विभाग की अनुमति के बिना लेआउट विकसित करने का आरोप; जमीन की खरीद-बिक्री के दस्तावेज रद्द करने और कथित मिलीभगत की जांच कराने की मांग
प्रणयकुमार बंडी
वणी, यवतमाल: यवतमाल जिले की वणी तहसील अंतर्गत चिंचोली और शिवनी गांव में कथित अवैध प्लॉटिंग और जमीन की खरीद-बिक्री को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले में महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को लिखित शिकायत देकर कथित अनियमितताओं की जांच कराने, प्रभावित खरीदारों को उनकी रकम वापस दिलाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, चिंचोली निवासी पर आरोप है कि संबंधित कृषि भूमि का अकृषिक (NA) रूपांतरण कराए बिना तथा नगर रचना विभाग की आवश्यक अनुमति प्राप्त किए बिना लेआउट विकसित कर जमीन के भूखंड बेचे गए। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस प्रक्रिया में नियमों और निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई, जिससे जमीन खरीदने वाले कई नागरिकों के आर्थिक हित प्रभावित होने की आशंका है।

NA अनुमति और लेआउट मंजूरी पर सवाल
शिकायत में दावा किया गया है कि संबंधित जमीन के लिए सक्षम प्राधिकारी से अकृषिक उपयोग की अनुमति, स्वीकृत लेआउट का नक्शा तथा आवश्यक मंजूरियां प्राप्त किए जाने के पर्याप्त दस्तावेज सामने नहीं आए हैं। आरोप है कि भूखंडों की बिक्री के दौरान खरीदारों को जमीन की वास्तविक कानूनी स्थिति की पूरी जानकारी नहीं दी गई।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित सरकारी अभिलेखों की जांच होना अभी आवश्यक है। संबंधित व्यक्तियों का पक्ष तथा सक्षम विभागों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
खरीदारों की मेहनत की कमाई पर संकट की आशंका
शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि यदि जमीन का लेआउट नियमानुसार स्वीकृत नहीं था, तो भूखंड खरीदने वाले नागरिकों को भविष्य में कानूनी और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में खरीदारों के दस्तावेज, जमीन का स्वामित्व, राजस्व अभिलेख, अकृषिक अनुमति और लेआउट की वैधता की जांच जरूरी बताई गई है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ स्थानीय अधिकारियों की कथित भूमिका की जांच की जानी चाहिए। हालांकि, किसी भी अधिकारी की संलिप्तता या मिलीभगत अभी प्रमाणित नहीं है।

शिकायतकर्ता ने राज्य सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की है. जिसमें से
- जमीन की खरीद-बिक्री की जांच: चिंचोली में संबंधित भूखंडों की बिक्री, लेआउट की मंजूरी और आवश्यक सरकारी अनुमतियों की तत्काल जांच कराई जाए। नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होने पर कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए।
- प्रभावित खरीदारों को राहत: जिन नागरिकों से कथित रूप से गलत जानकारी देकर रकम ली गई है, उनके मामलों की जांच कर नियमानुसार उनकी राशि वापस दिलाने के लिए उचित कानूनी कदम उठाए जाएं।
- दोषियों और जिम्मेदार अधिकारियों की जांच: यदि जांच में धोखाधड़ी, जाली दस्तावेज, जानबूझकर गलत जानकारी देने या अन्य संज्ञेय अपराधों के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के साथ-साथ किसी भी दोषी अधिकारी के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
जांच के बाद ही तय होगी कानूनी जिम्मेदारी
कानूनी दृष्टि से किसी कृषि भूमि पर प्लॉटिंग या उसके गैर-कृषि उपयोग की वैधता निर्धारित करने के लिए संबंधित भूमि के अभिलेख, लागू भूमि उपयोग नियम, सक्षम प्राधिकारी की अनुमति और नगर नियोजन संबंधी मंजूरियों की जांच आवश्यक है। केवल शिकायत के आधार पर किसी लेन-देन को स्वतः अवैध घोषित या रद्द नहीं किया जा सकता। इसी तरह, जमीन की बिक्री के दस्तावेज रद्द करने अथवा धनवापसी का निर्णय संबंधित कानून, उपलब्ध साक्ष्यों और सक्षम प्राधिकारी या न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार ही किया जा सकता है।

अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर
चिंचोली में कथित अवैध प्लॉटिंग के इस मामले में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राजस्व विभाग, नगर रचना विभाग और अन्य संबंधित अधिकारी शिकायत पर क्या कार्रवाई करते हैं। क्या संबंधित भूमि की अनुमति और लेआउट के अभिलेखों की जांच होगी? क्या प्रभावित खरीदारों की शिकायतों की सुनवाई होगी? और यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाएंगे?
इन सवालों के जवाब प्रशासनिक जांच और आधिकारिक दस्तावेजों से ही सामने आएंगे। फिलहाल, शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच और प्रभावित नागरिकों के हितों की रक्षा करना महत्वपूर्ण है।




