‘तीसरी आंख’ को बैनर से ढकने वालों पर कार्रवाई कब? हादसे या अपराध के बाद जागेंगे जिम्मेदार अधिकारी?
प्रणयकुमार बंडी
चंद्रपुर: शहर में अपराधों पर नजर रखने, यातायात व्यवस्था पर निगरानी रखने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लगाए गए CCTV कैमरे यदि बैनरों के पीछे छिप जाएं, तो सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। चंद्रपुर महानगरपालिका क्षेत्र के नागपुर–चंद्रपुर हाईवे पर स्थित जनता कॉलेज चौक के पास ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां सरकारी CCTV कैमरे के ठीक सामने राजनीतिक प्रचार से जुड़ा बैनर लगाए जाने की बात सामने आई है। इस स्थिति ने संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली और सार्वजनिक सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

भीड़भाड़ वाले चौक पर सुरक्षा से खिलवाड़?
जनता कॉलेज चौक शहर के व्यस्त स्थानों में से एक है। इसके आसपास मेहरा हॉस्पिटल, जनता कॉलेज, पेट्रोल पंप, साईं बाबा मंदिर, पिज्जा शॉप, ट्रेंड्स स्टोर, टी शॉप और होटल सहित कई प्रतिष्ठान मौजूद हैं। यहां दिनभर नागरिकों, विद्यार्थियों, वाहन चालकों और ग्राहकों की आवाजाही बनी रहती है।
ऐसे महत्वपूर्ण स्थान पर CCTV कैमरे के सामने बैनर लगा होना गंभीर चिंता का विषय है। यदि बैनर के कारण कैमरे का दृश्य बाधित हो रहा है, तो किसी दुर्घटना, यातायात उल्लंघन, विवाद या आपराधिक घटना के समय CCTV फुटेज से मिलने वाली मदद प्रभावित हो सकती है।
CCTV कैमरे सुरक्षा के लिए या सिर्फ दिखावे के लिए?
शहर में CCTV कैमरे लगाने का मुख्य उद्देश्य संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना, दुर्घटनाओं की जांच में सहायता करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में संबंधित विभागों की मदद करना है। लेकिन यदि इन्हीं कैमरों को इस तरह ढक दिया जाए कि उनकी निगरानी क्षमता प्रभावित हो, तो उनकी उपयोगिता पर सवाल उठना लाजिमी है।
नागरिकों के बीच यह सवाल चर्चा का विषय बन सकता है कि आखिर सरकारी सुरक्षा व्यवस्था के उपकरणों के सामने प्रचार सामग्री लगाने की अनुमति किसने दी? क्या बैनर लगाने से पहले संबंधित विभाग से अनुमति ली गई थी? यदि अनुमति दी गई, तो क्या कैमरे की दृश्य सीमा और सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखा गया?

ट्रैफिक विभाग और महानगरपालिका की जिम्मेदारी क्या?
इस मामले में यातायात पुलिस, चंद्रपुर महानगरपालिका और CCTV व्यवस्था के लिए जिम्मेदार विभाग की भूमिका स्पष्ट होना आवश्यक है। संबंधित अधिकारियों को मौके का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कैमरे का दृश्य बाधित तो नहीं हो रहा है और बैनर लगाने के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं।
यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए बैनर हटाने और CCTV कैमरे की निगरानी व्यवस्था को तत्काल बहाल करने की जरूरत है।
दुर्घटना या अपराध के बाद होगी कार्रवाई?
सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े ऐसे मामलों में लापरवाही की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। यदि किसी महत्वपूर्ण चौक पर लगा कैमरा ठीक से निगरानी नहीं कर पा रहा है, तो इसका समाधान किसी अप्रिय घटना के बाद नहीं, बल्कि समय रहते किया जाना चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जनता कॉलेज चौक पर CCTV कैमरे के सामने लगाए गए बैनर को लेकर जिम्मेदार विभाग कब संज्ञान लेंगे? क्या संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करेंगे, या फिर किसी दुर्घटना अथवा आपराधिक घटना के बाद ही सुरक्षा व्यवस्था की खामियों पर ध्यान दिया जाएगा?
शहर की सुरक्षा केवल कैमरे लगाने से सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि उनकी निगरानी क्षमता बनाए रखना और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन कराना भी उतना ही आवश्यक है। जनता कॉलेज चौक का यह मामला संबंधित विभागों के लिए समय रहते व्यवस्था दुरुस्त करने की एक महत्वपूर्ण चेतावनी है।




